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Prayagraj News: पितृपक्ष आज से, चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन
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आचार्य गोपाल जी मालवीय
पितृपक्ष शनिवार से प्रारंभ हो रहा है और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या यानी पितृ विसर्जन के साथ समापन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि व वंश वृद्धि के लिए श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है।
आश्विन कृष्ण पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है लेकिन श्राद्ध का पावन कार्य एक दिन पूर्व भाद्रपद पूर्णिमा से ही शुरू हो जाएगा। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा तिथि नहीं होती, इसलिए दिवंगत पूर्वजों का पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा। -गोपाल मालवीय, आचार्य
महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को और मातृ नवमी श्राद्ध चार अक्तूबर को किया जाएगा। इसके बाद सात को संन्यासी, यति व वैष्णव श्राद्ध के साथ-साथ मघा श्राद्ध संपन्न होगा। दुर्घटना या अकाल मृत्यु से प्रभावित परिजनों के लिए किया जाने वाला घात चतुर्दशी का श्राद्ध नौ अक्तूबर को पड़ेगा, जबकि 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा। इस वर्ष चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन संपन्न होगा। -डॉ. अमिताभ गौर, आचार्य
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धर्मशास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने का प्राथमिक अधिकार केवल पुत्र को प्राप्त है। पुत्र न हो तो पौत्र और पौत्र के अभाव में पुत्री का पुत्र यानी दौहित्र यह कर्म कर सकता है। यदि दोनों पक्षों में कोई वंशज न हो तो परिवार का कोई भी वैध उत्तराधिकारी श्राद्ध संपन्न कराने के लिए पात्र माना गया है। श्राद्ध कर्म संपन्न करने के लिए सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक की अवधि को सबसे उत्तम और पुण्य फलदायी माना गया है। -राजेंद्र पालीवाल, अध्यक्ष, प्रयाग धर्मसंघ
26 सितंबर से 10 अक्तूबर 2026 ( प्रयाग धर्मसंघ की ओर से जारी पितृ पक्ष श्राद्ध तिथियां )
26 सितंबर - शनिवार - पूर्णिमा
27 सितंबर - रविवार - प्रतिपदा
28 सितंबर - सोमवार - द्वितीया
29 सितंबर - मंगलवार - तृतीया/महाभरणी
30 सितंबर - बुधवार - चतुर्थी / पंचमी
1 अक्तूबर - बृहस्पतिवार - षष्ठी
2 अक्तूबर - शुक्रवार - सप्तमी
3 अक्तूबर - शनिवार - अष्टमी
4 अक्तूबर - रविवार - नवमी
5 अक्तूबर - सोमवार - दशमी
6 अक्तूबर - मंगलवार - एकादशी
7 अक्तूबर - बुधवार - द्वादशी /महाश्राद्ध
8 अक्तूबर - बृहस्पतिवार - त्रयोदशी
9 अक्तूबर - शुक्रवार - चतुर्दशी
10 अक्तूबर - शनिवार - सर्वपितृ अमावस्या
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आश्विन कृष्ण पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है लेकिन श्राद्ध का पावन कार्य एक दिन पूर्व भाद्रपद पूर्णिमा से ही शुरू हो जाएगा। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा तिथि नहीं होती, इसलिए दिवंगत पूर्वजों का पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा। -गोपाल मालवीय, आचार्य
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महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को और मातृ नवमी श्राद्ध चार अक्तूबर को किया जाएगा। इसके बाद सात को संन्यासी, यति व वैष्णव श्राद्ध के साथ-साथ मघा श्राद्ध संपन्न होगा। दुर्घटना या अकाल मृत्यु से प्रभावित परिजनों के लिए किया जाने वाला घात चतुर्दशी का श्राद्ध नौ अक्तूबर को पड़ेगा, जबकि 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा। इस वर्ष चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन संपन्न होगा। -डॉ. अमिताभ गौर, आचार्य
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धर्मशास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने का प्राथमिक अधिकार केवल पुत्र को प्राप्त है। पुत्र न हो तो पौत्र और पौत्र के अभाव में पुत्री का पुत्र यानी दौहित्र यह कर्म कर सकता है। यदि दोनों पक्षों में कोई वंशज न हो तो परिवार का कोई भी वैध उत्तराधिकारी श्राद्ध संपन्न कराने के लिए पात्र माना गया है। श्राद्ध कर्म संपन्न करने के लिए सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक की अवधि को सबसे उत्तम और पुण्य फलदायी माना गया है। -राजेंद्र पालीवाल, अध्यक्ष, प्रयाग धर्मसंघ
26 सितंबर से 10 अक्तूबर 2026 ( प्रयाग धर्मसंघ की ओर से जारी पितृ पक्ष श्राद्ध तिथियां )
26 सितंबर - शनिवार - पूर्णिमा
27 सितंबर - रविवार - प्रतिपदा
28 सितंबर - सोमवार - द्वितीया
29 सितंबर - मंगलवार - तृतीया/महाभरणी
30 सितंबर - बुधवार - चतुर्थी / पंचमी
1 अक्तूबर - बृहस्पतिवार - षष्ठी
2 अक्तूबर - शुक्रवार - सप्तमी
3 अक्तूबर - शनिवार - अष्टमी
4 अक्तूबर - रविवार - नवमी
5 अक्तूबर - सोमवार - दशमी
6 अक्तूबर - मंगलवार - एकादशी
7 अक्तूबर - बुधवार - द्वादशी /महाश्राद्ध
8 अक्तूबर - बृहस्पतिवार - त्रयोदशी
9 अक्तूबर - शुक्रवार - चतुर्दशी
10 अक्तूबर - शनिवार - सर्वपितृ अमावस्या

आचार्य गोपाल जी मालवीय

आचार्य गोपाल जी मालवीय