फाफामऊ सामूहिक हत्याकांड : ट्विटर पर जिले का नाम इलाहाबाद लिखने पर ट्रोल हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
अखिलेश यादव के ट्विट करते ही तमाम यूजरों ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों ले लिया और उनकी खिंचाई शुरू कर दी। कुछ यूजरों ने तो उन्हें जिहादी सोच वाला और हिंदुत्व के खिलाफ भी बता दिया।
विस्तार
यूजर्य ने कहा- प्रयागराज बोलो भइया
प्रयागराज की बजाय इलाहाबाद लिखने पर यूजर्स ने जमकर अखिलेश यादव को ट्रोल किया। विक्रम तिवारी नाम के यूजर ने लिखा- 'भाई, इलाहाबाद नहीं , प्रयागराज कहो। और अपराधी सपा के ही होते हैं। गेस्ट हाउस कांड याद है? एक दलित महिला के कनपटी पर रिवाल्वर रखकर उसके चीर हरण दुशासन के चेलों ने किया था। जिसे एक भाजपा नेता ने बचाया था।'
अखिलेश यादव ने लिखा- 'इलाहाबाद के फाफामऊ में दबंगों के द्वारा 4 दलितों की हत्या दलित विरोधी भाजपा सरकार पर एक और बदनुमा दाग है। घोर निंदनीय! उम्मीद है ये अपराधी बिना चश्मे के भी दिख जाएंगे...'
इलाहाबाद के फाफामऊ में दबंगों के द्वारा 4 दलितों की हत्या दलित विरोधी भाजपा सरकार पर एक और बदनुमा दाग़ है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 27, 2021
घोर निंदनीय!
उम्मीद है ये अपराधी बिना चश्मे के भी दिख जाएँगे…
भाई, इलाहाबाद नहीं , प्रयागराज कहो।
— Vikram Tiwari 🇮🇳 (@vikramt51) November 27, 2021
और अपराधी सपा के ही होते हैं।
गेस्ट हाउस कांड याद है?
एक दलित महिला के कनपटी पर रिवाल्वर रखकर उसके चीर हरण दुशासन के चेलों ने किया था।
जिसे एक भाजपा नेता ने बचाया था।
विक्रम साहू नाम के यूजर ने लिखा- 'जो इंसान up का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है उसको अभी तक इतना ज्ञान नही है कि "इलाहाबाद" का नाम (प्रयागराज) है।'
राष्ट्रवादी राठौर नाम के यूजर ने लिखा- 'इलाहाबाद की नहीं प्रयागराज की घटना है महोदय। सबके नाम बदल कर बोलते हो आप इसलिए आज कल सब आपको अलग नाम से बुलाते हैं। शुरुआत आपने ही की थी और दबंग कौन, ठाकुर ,पंडित, बनिया आखिर कौन ??? लेकिन दलित शब्द कहा से आया, ये बोलिये 4 लोगो की हत्या इसलिये चुनाव हार रहे हैं इकतरफा होकर।
प्रयागराज बोलना सिख लो अखिलेशुदीन भैया..पुरानी रंजिश थी जिसने भी किया है उसे पुलिस ने पकड़ भी लिया और कुटाई भी हो रही
— Gyanendra Rai (@Rai3Gyanendra) November 27, 2021
#जय_प्रयागराज
— रामचंद्र सिंह (@RamRamcsingh1) November 27, 2021
भाई तुम अभी इलाहाबादी हो। इलाहाबाद लिख कर क्या दर्शाना चाह रहे हो। अब इलाहाबाद नहीं प्रयागराज है । तुम पहले अपनी इतिहास मे सुधार कर लो और जनरल नालेज सूधारो, तुमने प्रयागराज को इलाहाबाद लिख कर प्रयागराज की जनता का घोर अपमान किया है।
शिवम पांडेय नाम के यूजर ने लिखा प्रयागराज को इलाहाबाद बोलकर अपनी मानसिकता प्रकट कर रहे हैं अखिलेश यादव, इनका राष्ट्रवाद, हिंदुत्व से कोई मतलब नहीं। और तो और कानून को भी ये अपनी थाली का भोजन मान बैठे हैं। जो आज नए नाम के नए शहर को प्रगति पर बदलता हुआ नहीं देखना चाहते।
पं. राघवेंद्र चौबे ने लिखा इलाहाबाद, नहीं महोदय, उसका नाम प्रयागराज है, क्या आप को प्रयागराज नाम रास नहीं आ रहा है तो बता दीजिए, प्रयागराज पसंद नहीं है तो दलित, कैसे पसंद हैं, कीं इनको वोट के लिए इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हो, जीतने के बाद इनको मक्खी की तरह निकालकर फेंक देंगे और जिहादी सोच वालों का समर्थन करने लगेंगे।
बता दें कि पिछले दिनों सरदार पटेल की 146वीं जयंती पर अखिलेश यादव ने पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का जिक्र किया था। अखिलेश यादव ने कहा था, 'सरदार पटेल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना ने एक ही संस्थान से पढ़ाई की और बैरिस्टर बने। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में मदद की और संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटे। इस बयान को लेकर अखिलेश यादव लंबे समय से भाजपा के निशाने पर हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा था, "समाजवादी पार्टी प्रमुख ने जिन्ना की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की। यह शर्मनाक है। यह तालिबानी मानसिकता है जो देश को बांटने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया है।'
भूल हुई या नई चाल?
जिन्ना के बाद प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर अखिलेश यादव फिर से चर्चा में हैं। सवाल उठ रहा है कि अखिलेश यादव ने ये भूल से लिख दिया है या जानबूझकर इलाहाबाद लिखा है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव कहते हैं, 'ये पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने इस तरह के बयान दिए हों। वह उन तमाम नामों का विरोध करते आए हैं, जिसे योगी सरकार में बदला गया है। इस वक्त भी प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर एक खास वर्ग का वोट पाने की चाल हो सकती है।'