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High Court : बेनामी संपत्ति मामले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी देशराज सिंह की याचिका खारिज
Fri, 27 Dec 2024 02:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 27 Dec 2024 02:50 PM IST
सार
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत ने दिया है। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम की धारा 26(3) के खिलाफ धारा 46 के तहत अपील पोषणीय है।
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बाबू सिंह कुशवाहा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेनामी संपत्ति जब्त किए जाने के खिलाफ पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी देशराज सिंह की ओर से दाखिल यचिका पोषणीयता के आधार पर खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें वैकल्पिक उपचार के तहत सक्षम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दाखिल करने की छूट प्रदान की है।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत ने दिया है। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम की धारा 26(3) के खिलाफ धारा 46 के तहत अपील पोषणीय है। यह याचिका पोषणीय नहीं है। वहीं, याची के अधिवक्ता ने कहा कि प्राधिकरण की ओर से धारा 26(3) के तहम पारित आदेश क्षेत्राधिकार के बाहर पारित किया गया है। लिहाजा, याचिका पोषणीय है।
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कोर्ट ने याचिका को पोषणीय नहीं मानते हुए खारिज कर दी। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबियों की कंपनी विंध्य शक्ति सीमेंट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गई है। बाबू सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की जांच कर रहे ईडी को कुछ ऐसी संपत्तियों की जानकारी मिली है, जो कंपनी के नाम से खरीदी गई थीं।
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हाल ही में आयकर विभाग ने भी बाबू सिंह की लखनऊ में कानपुर रोड स्थित एक बेशकीमती संपत्ति को बेनामी एक्ट में जब्त की थी। यह संपत्ति भी विंध्य शक्ति के नाम थी, जिसे बाद में कानपुर के देशराज सिंह को बेची गई थी। बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत बीते दस साल से जांच कर रहे ईडी ने हाल ही में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस भी दर्ज किया था। मामले में ईडी बाबू सिंह की ऐसी संपत्तियों का पता लगा रही है, जिनका बेनामीदार कोई और है।