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Prayagraj News: मोदी व योगी के खिलाफ याचिका खारिज, याची पर 50 हजार का जुर्माना
Tue, 22 Sep 2026 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:17 AM IST
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जिला अदालत ने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ व अन्य के खिलाफ दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने याचिका को आधारहीन और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए याची राकेश नाथ पांडेय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह आदेश प्रभारी सत्र न्यायाधीश जयेंद्र कुमार की अदालत ने दिया है। याची ने एसीजेएम कोर्ट की ओर से मूल शिकायत को खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। आरोप लगाया था कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पीएम की भागीदारी व भाषण संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत था। इसके अलावा नेताओं की ओर से चुनावी रैलियों में भाग लेने को सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बताया था।
याची ने आरोप लगाया था कि जिम्मेदार सांविधानिक पदों पर बैठे लोगों ने अपनी शपथ का सही से पालन नहीं किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रभारी सत्र न्यायाधीश की अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों से किसी भी प्रकार का अपराध घटित होना साबित नहीं होता है। सांविधानिक शपथ के उल्लंघन के दावे से कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।
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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया। कहा कि न्यायिक समय व सार्वजनिक संसाधनों को इस तरह की तुच्छ और व्यर्थ याचिकाओं में बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने एसीजेएम के आदेश को बरकरार रख याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये की जुर्माना राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया।
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यह आदेश प्रभारी सत्र न्यायाधीश जयेंद्र कुमार की अदालत ने दिया है। याची ने एसीजेएम कोर्ट की ओर से मूल शिकायत को खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। आरोप लगाया था कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पीएम की भागीदारी व भाषण संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत था। इसके अलावा नेताओं की ओर से चुनावी रैलियों में भाग लेने को सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बताया था।
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याची ने आरोप लगाया था कि जिम्मेदार सांविधानिक पदों पर बैठे लोगों ने अपनी शपथ का सही से पालन नहीं किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रभारी सत्र न्यायाधीश की अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों से किसी भी प्रकार का अपराध घटित होना साबित नहीं होता है। सांविधानिक शपथ के उल्लंघन के दावे से कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।
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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया। कहा कि न्यायिक समय व सार्वजनिक संसाधनों को इस तरह की तुच्छ और व्यर्थ याचिकाओं में बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने एसीजेएम के आदेश को बरकरार रख याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये की जुर्माना राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया।