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गंगा की बाढ़ से बेघर हुए लोग, हजारों घरों में घुसा पानी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 12 Sep 2018 02:13 AM IST
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इलाहाबाद
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गंगा-यमुना के चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ने से साथ मंगलवार को कछारी इलाके की बस्तियों में हड़कंप मच गया। बाढ़ से कछार में बसे हजारों घरों में पानी घुस गया। पानी में बर्बाद होती गृहस्थी बचाने के लिए दो हजार से अधिक परिवारों ने घर छोड़ दिया। प्रभावित इलाकों में लोग सामान हटाने के लिए दिन भर जूझते रहे। बेली से नागवासुकि के बीच गंगा की तलहटी में बसी आबादी बाढ़ से घिर गई। देर शाम बेली कछार से बढ़ता हुआ गंगा का पानी नेवादा की बस्तियों में घुस गया। रसूलाबाद घाट,दशाश्वमेध घाट डूब गए। श्मशान घाटों पर पानी आने से अब अंतिम संस्कार भी ऊपरी हिस्सों में होने लगा है। हालांकि देर रात दोनों नदियों के वेग में कमी आ गई, लेकिन मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं।
मंगलवार की रात बाढ़ प्रभावित बस्तियों में पानी घुसने से लोगों की नींद उड़ गई। गंगा की लहरें बेनी बांध की ढाल को डुबते हुए ऊपर चढ़ने लगी हैं। नागवासुकि से दशाश्वमेध के बीच की झोपड़ियां जलमग्न हो गईं। दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां डूब गईं। लगातार जल स्तर बढ़ने से दोपहर बाद कछारी इलाके के हजारों घरों में पानी घुस गया। लोग चारपाई, बिछौना और बर्तन लेकर दिन भर दूसरे स्थानों पर शरण लेते रहे।
बड़ा बाघाड़ा, छोटा बाघाड़ा, सलोरी में नालों पर बने सैकड़ों घरों में ओवरफ्लो होकर गंदा पानी घुसने से सांस लेने मुश्किल हो गया। घरों में पानी आने से लोग ठिकाना बदलने के लिए मजबूर हो गए। नैपुरवा, मेहदौरी, रसूलाबाद, जोंदवल, शंकरघाट, चिल्ला, शिवकुटी, के अलावा बेली कछार, राजापुर, गंगापुर के कछार में बने हजारों घरों में पानी घुसने से आफत खड़ी हो गई। नेवादा की बस्तियों में पानी आने के बाद लोग भूतल से सामान समेट कर या तो छतों पर पहुंच गए, या फिर शहर में परिचितों, रिश्तेदारों के यहां शरण ले ली।
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आपदा प्रबंधन टीम राहत-बचाव में जुटी
इलाहाबाद। कछारी बस्तियों में पानी घुसने और लोगों के दर-बद-दर होन के बीच मंगलवार को बाढ़ आपदा प्रबंधन की कोशिशें शुरू हो गईं। तहसीलदार, लेखपालों के साथ एनडीआरएफ के कमांडर अब्दुल्लाह खान ने प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू के लिए दौरा किया। इस दौरान राहत शिविरों का भी अफसरों ने हाल देखा। एनडीआरएफ के टीम कमांडर अब्दुल्लाह ने छोटा बाघाड़ा,धरहरिया में बाढ़ से घिरे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान एनी बेसेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज में बने बाढ़ राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों के रहने, खाने के इंतजाम कराए गए। इस दौरान बाढ़ प्रखंड के एक्सईएन मनोज कुमार सिंह भी मौजूद थे।
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मंगलवार की रात बाढ़ प्रभावित बस्तियों में पानी घुसने से लोगों की नींद उड़ गई। गंगा की लहरें बेनी बांध की ढाल को डुबते हुए ऊपर चढ़ने लगी हैं। नागवासुकि से दशाश्वमेध के बीच की झोपड़ियां जलमग्न हो गईं। दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां डूब गईं। लगातार जल स्तर बढ़ने से दोपहर बाद कछारी इलाके के हजारों घरों में पानी घुस गया। लोग चारपाई, बिछौना और बर्तन लेकर दिन भर दूसरे स्थानों पर शरण लेते रहे।
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बड़ा बाघाड़ा, छोटा बाघाड़ा, सलोरी में नालों पर बने सैकड़ों घरों में ओवरफ्लो होकर गंदा पानी घुसने से सांस लेने मुश्किल हो गया। घरों में पानी आने से लोग ठिकाना बदलने के लिए मजबूर हो गए। नैपुरवा, मेहदौरी, रसूलाबाद, जोंदवल, शंकरघाट, चिल्ला, शिवकुटी, के अलावा बेली कछार, राजापुर, गंगापुर के कछार में बने हजारों घरों में पानी घुसने से आफत खड़ी हो गई। नेवादा की बस्तियों में पानी आने के बाद लोग भूतल से सामान समेट कर या तो छतों पर पहुंच गए, या फिर शहर में परिचितों, रिश्तेदारों के यहां शरण ले ली।
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आपदा प्रबंधन टीम राहत-बचाव में जुटी
इलाहाबाद। कछारी बस्तियों में पानी घुसने और लोगों के दर-बद-दर होन के बीच मंगलवार को बाढ़ आपदा प्रबंधन की कोशिशें शुरू हो गईं। तहसीलदार, लेखपालों के साथ एनडीआरएफ के कमांडर अब्दुल्लाह खान ने प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू के लिए दौरा किया। इस दौरान राहत शिविरों का भी अफसरों ने हाल देखा। एनडीआरएफ के टीम कमांडर अब्दुल्लाह ने छोटा बाघाड़ा,धरहरिया में बाढ़ से घिरे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान एनी बेसेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज में बने बाढ़ राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों के रहने, खाने के इंतजाम कराए गए। इस दौरान बाढ़ प्रखंड के एक्सईएन मनोज कुमार सिंह भी मौजूद थे।