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समय के अनुरूप स्वयं को बदलें युवा
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 14 Oct 2016 01:26 AM IST
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इलाहाबाद। मानवता की सेवा में समर्पित भारत सेवाश्रम संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष पर पांच दिनी समारोह बृहस्पतिवार से आरंभ हुआ। बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने युवाओं से समय के साथ चलने का आह्वान किया। कहा, प्रकृति के अनुसार परिवर्तन मानव स्वभाव है, परन्तु बिना नैतिक शिक्षा के समाज का उत्थान संभव नहीं है। जिस प्रकार ऋतुओं के अनुरूप मनुष्य अपनी वेशभूषा बदलता है, उसी प्रकार युवाओं को समय के अनुरूप अपने को ढालना चाहिए। कार्यक्रम के अध्यक्ष नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.केबी पाण्डेय ने कहा, संतो के दर्शन से रास्ता मिलता और अधर्म दूर भागता है। युवाओं को धर्म से जुड़ना चाहिए। इसी क्रम में युवा कल्याण एवं युवा संगठन पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
गैरिक पताका उत्तोलन से शुरुआत के बाद महिलाओं की सिलाई कढाई प्रतियोगिता हुई। रक्षी दल की ओर से लाठी व छुरा खेल का प्रदर्शन हुआ। बाद में संन्यासियों की ओर से विशेष वीरभाव दीपक आरती उतारी गई। शाम को डा.चंदना मुखर्जी के निर्देशन में संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। आरंभ में स्वामी आत्मस्थानंद ने उद्बोधन संगीत प्रस्तुत किया। वेदपाठी बटुकों की ओर से स्वस्तिवाचन किया गया। पं.व्रतशील शर्मा ने संयोजन, बजरंग बली गिरि ने संचालन और आश्रम के सहसचिव स्वामी विश्वप्रेमानंद ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद,, स्वामी भाष्करानंद, स्वामी आत्मज्ञानानंद, स्वामी सत्यमित्रांनद, प.हरिमोहन मालवीय, शिवेन्द्र मिश्र, पदुम जायसवाल, पार्षद दिनेश गुप्ता छेदी, उमेश चन्द्र मिश्र, आलोक चतुर्वेदी, प.प्रभाकर भट्ट, सरदार अजीत सिंह, चीफ वार्डेन अनिल कुमार आदि मौजूद थे। इसी क्रम में 14 अक्तूबर को सुबह दस बजे महामुक्तिरथ शवयान का लोकार्पण एवं दोपहर दो बजे से शोभायात्रा निकाली जाएगी।
0 नागरिक अभिनंदन, मेधावियों को सम्मान
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने मानव सेवा में भारत सेवाश्रम संघ के सौ वर्षों के योगदान के लिए नगर की 21 संस्थाओं की ओर से संघ के महासचिव स्वामी विश्वप्रेमानंद का नागरिक अभिनंदन करते हुए उन्हें मानपत्र प्रदान किया। इसी क्रम में उन्होंने सौ जरूरतमंदों व मेधावियों को एक-एक हजार रुपये छात्रवृत्ति, शताब्दी वर्ष स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम प्रदान किया।
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भारत सेवाश्रम संघ:सेवा के सौ बरस
प्रयाग में भारत सेवाश्रम संघ की प्राणप्रतिष्ठा सौ बरस पूर्व माघी पूर्णिमा को हुई थी। संघ की स्थापना करने वाले स्वामी प्रणवानंद ने वर्ष 1924 में प्रयाग महाकुंभ में स्वामी गोविंदानंद गिरि से सन्यास दीक्षा ली और नया नामकरण प्राप्त किया। वर्ष 1930 में प्रयाग में सेवाश्रम की स्थापना के साथ महाकुंभ में व्यापक सेवाकार्य किया।
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गैरिक पताका उत्तोलन से शुरुआत के बाद महिलाओं की सिलाई कढाई प्रतियोगिता हुई। रक्षी दल की ओर से लाठी व छुरा खेल का प्रदर्शन हुआ। बाद में संन्यासियों की ओर से विशेष वीरभाव दीपक आरती उतारी गई। शाम को डा.चंदना मुखर्जी के निर्देशन में संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। आरंभ में स्वामी आत्मस्थानंद ने उद्बोधन संगीत प्रस्तुत किया। वेदपाठी बटुकों की ओर से स्वस्तिवाचन किया गया। पं.व्रतशील शर्मा ने संयोजन, बजरंग बली गिरि ने संचालन और आश्रम के सहसचिव स्वामी विश्वप्रेमानंद ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद,, स्वामी भाष्करानंद, स्वामी आत्मज्ञानानंद, स्वामी सत्यमित्रांनद, प.हरिमोहन मालवीय, शिवेन्द्र मिश्र, पदुम जायसवाल, पार्षद दिनेश गुप्ता छेदी, उमेश चन्द्र मिश्र, आलोक चतुर्वेदी, प.प्रभाकर भट्ट, सरदार अजीत सिंह, चीफ वार्डेन अनिल कुमार आदि मौजूद थे। इसी क्रम में 14 अक्तूबर को सुबह दस बजे महामुक्तिरथ शवयान का लोकार्पण एवं दोपहर दो बजे से शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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0 नागरिक अभिनंदन, मेधावियों को सम्मान
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने मानव सेवा में भारत सेवाश्रम संघ के सौ वर्षों के योगदान के लिए नगर की 21 संस्थाओं की ओर से संघ के महासचिव स्वामी विश्वप्रेमानंद का नागरिक अभिनंदन करते हुए उन्हें मानपत्र प्रदान किया। इसी क्रम में उन्होंने सौ जरूरतमंदों व मेधावियों को एक-एक हजार रुपये छात्रवृत्ति, शताब्दी वर्ष स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम प्रदान किया।
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भारत सेवाश्रम संघ:सेवा के सौ बरस
प्रयाग में भारत सेवाश्रम संघ की प्राणप्रतिष्ठा सौ बरस पूर्व माघी पूर्णिमा को हुई थी। संघ की स्थापना करने वाले स्वामी प्रणवानंद ने वर्ष 1924 में प्रयाग महाकुंभ में स्वामी गोविंदानंद गिरि से सन्यास दीक्षा ली और नया नामकरण प्राप्त किया। वर्ष 1930 में प्रयाग में सेवाश्रम की स्थापना के साथ महाकुंभ में व्यापक सेवाकार्य किया।