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लोग आते गए, आते गए... और आते ही चले गए
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People came, came ... and they came
- फोटो : ALDCOMPACT
लोग आते गए, आते गए ...और आते ही चले गए
0 स्वत: स्फूर्त ढंग से उमड़ी भीड़, प्रशासन भी अचंभित, नहीं थी ऐसे आंदोलन की उम्मीद
0 सपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद सुकुन मेें थे अफसर लेकिन अचानक बदला नजारा
प्रयागराज। दिन बृहस्पतिवार। सुबह 10 बजे का समय। सुभाष चौराहा, बालसन और पीडी टंडन पार्क। कड़ाके की ठंड की वजह से अपेक्षाकृत अधिक सन्नाटा है। बस, फोर्स की मौजूदगी कुछ घटित होने का संकेत दे रही है। सुभाष चौराहा पर दिन में एक बजे भी यही दृश्य है और पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील है। संगीनों के साए में दुकानें भी खुली हैं लेकिन इसके आधा घंटा बाद ही पूरा नजारा बदल गया। लोग आते गए, आते गए ...और आते ही चले गए। देखते ही देखते हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। मुद्दा था एनआरसी और सीएए का विरोध। सबकुछ स्वत: स्फूर्त था। यह जमावड़ा प्रशासन को भी अचंभित करने वाला रहा और पूरे माहौल में तनाव व्याप्त हो गया।
एनआरसी एवं सीएए के विरोध में सपा और वामपंथी संगठनों की ओर से धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। पूर्व के आंदोलनों को देखते हुए प्रशासन की सपा कार्यकर्ताओं पर खास नजर रही। दिन में करीब 12 बजे उनकी गिरफ्तारी के बाद अफसरों और फोर्स ने सुकुन महसूस किया लेकिन बिजली घर और सुभाष चौराहा पर अचानक हजारों लोगों के पहुंच जाने से सभी की धड़कने बढ़ गईं। करीब डेढ़ बजे चौक से सैकड़ों लोग बिजली घर चौराहा की तरफ चले आ रहे थे। सीएवी इंटर कालेज, बस अड्डा, नवाब युसूफ रोड हर तरफ से झुंड में लोग चले आ रहे थे और देखते ही देखते हजारों की भीड़ एकत्रित हो गए। ये सभी लोग जुलूस बनाकर नवाब युसुफ रोड होते हुए सुभाष चौराहा पहुंचे। वहां भी इस दौरान अचानक बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हो चुका था और फिर नारेबाजी के बाद बड़ा जुलूस निकला।
इस तरह के आंदोलन की किसी को उम्मीद नहीं थी। यह नजारा फोर्स के अलावा शहरियों के लिए भी अचंभित करने वाला रहा। प्रशासन का खुफिया तंत्र भी एक बड़े वर्ग की इस नाराजगी को भांप नहीं पाया। अलग-अलग संगठनों की ओर से आंदोलन की घोषणा की गई थी लेकिन इतनी बड़ी तैयारी जमीन पर नहीं दिखी। इसे सोशल मीडिया की ताकत के अलावा कई मुद्दों पर लोगों की नाराजगी के रूप में भी देखा जा रहा है, जो एनआरसी एवं सीएए के विरोध के रूप में मुखर होकर सामने आया। इस पूरे आंदोलन को सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है।
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आज भी जमावड़े की आशंका
0 एनआरसी और सीएए के विरोध में धरना-प्रदर्शन अभी शांत होता नहीं दिख रहा। शुक्रवार को फिर बड़े आंदोलन और जमावड़े की आशंका है। फेसबुक, व्हाट्सअप पर इसके लिए अभियान शुरू है। इबादत गाहाें से जुलूस निकाले जाने की चर्चा है। हालांकि, इमामों ने इसे अफवाह करार दिया।
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0 स्वत: स्फूर्त ढंग से उमड़ी भीड़, प्रशासन भी अचंभित, नहीं थी ऐसे आंदोलन की उम्मीद
0 सपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद सुकुन मेें थे अफसर लेकिन अचानक बदला नजारा
प्रयागराज। दिन बृहस्पतिवार। सुबह 10 बजे का समय। सुभाष चौराहा, बालसन और पीडी टंडन पार्क। कड़ाके की ठंड की वजह से अपेक्षाकृत अधिक सन्नाटा है। बस, फोर्स की मौजूदगी कुछ घटित होने का संकेत दे रही है। सुभाष चौराहा पर दिन में एक बजे भी यही दृश्य है और पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील है। संगीनों के साए में दुकानें भी खुली हैं लेकिन इसके आधा घंटा बाद ही पूरा नजारा बदल गया। लोग आते गए, आते गए ...और आते ही चले गए। देखते ही देखते हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। मुद्दा था एनआरसी और सीएए का विरोध। सबकुछ स्वत: स्फूर्त था। यह जमावड़ा प्रशासन को भी अचंभित करने वाला रहा और पूरे माहौल में तनाव व्याप्त हो गया।
एनआरसी एवं सीएए के विरोध में सपा और वामपंथी संगठनों की ओर से धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। पूर्व के आंदोलनों को देखते हुए प्रशासन की सपा कार्यकर्ताओं पर खास नजर रही। दिन में करीब 12 बजे उनकी गिरफ्तारी के बाद अफसरों और फोर्स ने सुकुन महसूस किया लेकिन बिजली घर और सुभाष चौराहा पर अचानक हजारों लोगों के पहुंच जाने से सभी की धड़कने बढ़ गईं। करीब डेढ़ बजे चौक से सैकड़ों लोग बिजली घर चौराहा की तरफ चले आ रहे थे। सीएवी इंटर कालेज, बस अड्डा, नवाब युसूफ रोड हर तरफ से झुंड में लोग चले आ रहे थे और देखते ही देखते हजारों की भीड़ एकत्रित हो गए। ये सभी लोग जुलूस बनाकर नवाब युसुफ रोड होते हुए सुभाष चौराहा पहुंचे। वहां भी इस दौरान अचानक बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हो चुका था और फिर नारेबाजी के बाद बड़ा जुलूस निकला।
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इस तरह के आंदोलन की किसी को उम्मीद नहीं थी। यह नजारा फोर्स के अलावा शहरियों के लिए भी अचंभित करने वाला रहा। प्रशासन का खुफिया तंत्र भी एक बड़े वर्ग की इस नाराजगी को भांप नहीं पाया। अलग-अलग संगठनों की ओर से आंदोलन की घोषणा की गई थी लेकिन इतनी बड़ी तैयारी जमीन पर नहीं दिखी। इसे सोशल मीडिया की ताकत के अलावा कई मुद्दों पर लोगों की नाराजगी के रूप में भी देखा जा रहा है, जो एनआरसी एवं सीएए के विरोध के रूप में मुखर होकर सामने आया। इस पूरे आंदोलन को सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है।
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आज भी जमावड़े की आशंका
0 एनआरसी और सीएए के विरोध में धरना-प्रदर्शन अभी शांत होता नहीं दिख रहा। शुक्रवार को फिर बड़े आंदोलन और जमावड़े की आशंका है। फेसबुक, व्हाट्सअप पर इसके लिए अभियान शुरू है। इबादत गाहाें से जुलूस निकाले जाने की चर्चा है। हालांकि, इमामों ने इसे अफवाह करार दिया।