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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा- माननियों को पेंशन तो कर्मियों को क्यों नहीं

Sat, 09 Feb 2019 03:46 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Sat, 09 Feb 2019 03:46 AM IST
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Pensioners for the MP MLA then why do not for the workers

पुरानी पेंशन के लिए राज्य कर्मियों की हड़ताल को लेकर प्रदेश सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने पूछा, कर्मचारियों की सहमति बिना उनका अंशदान शेयर में कैसे लगाया जा सकता है?

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यह रकम डूब गई तो जिम्मेदार कौन होगा? राजकीय मुद्रणालय कर्मचारियों की हड़ताल के कारण हाईकोर्ट की कॉज लिस्ट न छपने पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की है। इस पर  सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये की लूटखसोट वाली योजनाएं लागू करने में नहीं हिचकती है, तो 30-35 साल सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारी को पेंशन क्यों नहीं देना चाहती है? क्या सरकार कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन देने का आश्वासन भी नहीं दे सकती है? 
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कोर्ट का कहना था कि यदि नई पेंशन योजना इतनी ही अच्छी है तो उसे सांसदों और विधायकों के लिए क्यों नहीं लागू किया जा रहा? साथ ही कहा कि सांसदों और विधायकों को बिना किसी नौकरी या काम के पेंशन दी जा रही है। ऐसे लोग साथ में वकालत या दूसरे व्यवसाय भी कर रहे हैं। जबकि सरकार को लंबी सेवा देने वाले कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी जा रही है।
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पीठ का कहना था कि कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनता का नुकसान होता है। कोर्ट ने कर्मचारी नेताओं से अपनी शिकायत और नई पेंशन स्कीम की खामियों का ब्यौरा दस दिन के भीतर अदालत में प्रस्तुत करने के लिए कहा है। साथ ही सरकार को इस मामले पर विचार कर 25 फरवरी तक जानकारी देने का निर्देश दिया है। उधर, कर्मचारी नेता टीपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि हड़ताल समाप्त कर दी गई है। राजकीय मुद्रणालय में काम शुरू हो गया है। सरकार कर्मचारियों की मांग नहीं मान रही है। नई पेंशन योजना वर्ष 2005 से लागू की गई है, जिसका कर्मचारी विरोध कर रहे हैं।

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