PDA : 33 साल बाद भी नई टाउनशिप नहीं शुरू कर सका पीडीए, लोग महंगे दामों पर निजी बिल्डरों से खरीद रहे आवास
शहरी क्षेत्र के विकास के साथ ही शहरवासियों को अच्छी कीमत पर आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण की है, लेकिन पिछले 33 सालों में प्राधिकरण की तरफ से कोई नई टाउनशिप योजना की शुरूआत नहीं की जा सकी है।
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शहरी क्षेत्र के विकास के साथ ही शहरवासियों को अच्छी कीमत पर आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण की है, लेकिन पिछले 33 सालों में प्राधिकरण की तरफ से कोई नई टाउनशिप योजना की शुरूआत नहीं की जा सकी है। प्राधिकरण इसके पीछे का मुख्य कारण पर्याप्त जमीन का न होना बता रहा है, जबकि निजी बिल्डर शहर के पॉश इलाकों में आवासीय योजनाओं की झड़ी लगा रहे हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी बिल्डरों से ऊंची कीमतों पर आवास लेना पड़ रहा है।
वर्ष 1990 तक प्राधिकरण की तरफ से कालिंदीपुरम और शांतिपुरम टाउनशिप को तैयार कराने के बाद से कोई भी नई टाउनशिप योजना की शुरूआत नहीं की गई है। नैनी में प्राधिकरण की तरफ से कुछ सालों पहले नव प्रयागम आवास योजना की शुरूआत की तैयारी थी। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किया था, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चली गई। आखिरकार प्राधिकरण को लोगों का पैसा भी लौटाना पड़ा।
इसके बाद एक बार फिर से प्राधिकरण ने नैनी एसटीपी के पास नई टाउनशिप की योजना बनाई, इसके लिए भी पूरा लेआउट तैयार करा लिया गया। इसके बाद से यह योजना भी अधर में है। ऐसे में लोगों के पास प्राधिकरण से आवास लेने का विकल्प ही लगभग समाप्त हो गया है। वर्तमान में भी प्राधिकरण सिर्फ सड़कों के निर्माण और शहर के सौदर्यीकरण पर ही ध्यान दे रहा है, लेकिन नई टाउनशिप के लिए प्राधिकरण के पास फिलहाल कोई योजना नहीं है। वहीं, सीमा विस्तार के बाद प्राधिकरण के क्षेत्र का भी विस्तार हुआ है। इस विस्तारित क्षेत्र में निजी बिल्डर लगातार आवासीय योजना ला रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण उनसे काफी पीछे है।
कास्तकार प्राधिकरण को जमीन देने में नहीं ले रहे रुचि
जमीन की कमी और लैंड बैंक खाली हाेने के कारण प्राधिकरण ने विस्तारित क्षेत्र में कास्तकारों से जमीन खरीदने की योजना बनाई थी। करीब साल भर पहले बनी योजना के बाद भी कास्तकार प्राधिकरण को जमीन देने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण प्राधिकरण की तरफ से जमीन की तय कीमत है। वहीं, प्राधिकरण से अधिक कीमत पर निजी बिल्डर जमीन खरीद कर आवासीय योजना तैयार करा रहे हैं। इस बारे में प्राधिकरण के अधिकारी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।