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पीसीएस मेंस में चिकित्सा विज्ञान हो सकता है वैकल्पिक विषय
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 25 Jan 2017 01:10 AM IST
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पीसीएस मुख्य परीक्षा में चिकित्सा विज्ञान भी वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल हो सकता है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह सुझाव दिया। कार्यशाला में शामिल कुलपतियों और आईएएस तथा आईपीएस अधिकारियों ने वैकल्पिक विषयों तथा सामान्य अध्ययन के सिलेबस में भी व्यापक बदलाव की जरूरत बताई।
पीसीएस मुख्य परीक्षा में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने तथा उसके सिलेबस का खाका तैयार करने के लिए आयोग में कार्यशाला आयोजित की गई। सिविल सेवा में चिकित्सा विज्ञान एक विषय के रूप में शामिल है। प्रतियोगी पीसीएस में भी इसे शामिल करने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को विशेषज्ञों ने भी इस पर सहमति जताई। अब इसका प्रस्ताव आयोग के सामने रखा जाएगा। विशेषज्ञाें का कहना था कि सामान्य अध्ययन का सिलेबस उत्तर प्रदेश पर केंद्रित होना चाहिए।
यानी, सिलेबस और पेपर में उत्तर प्रदेश का अधिक भाग शामिल किया जाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि वैकल्पिक विषयों का सिलेबस वर्षों पुराना है, जबकि तकरीबन सभी विषयों में नई जानकारियां शामिल हो चुकी हैं। इसे ध्यान में रखकर सिलेबस को रिव्यू करने की जरूरत है। आयोग के सचिव अटल राय का कहना है कि कार्यशाला की रिपोर्ट आयोग के सामने रखी जाएगी। कार्यशाला में इलाहाबाद केंद्रीद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद, कमिश्नर राजन शुक्ला, आईपीएस, शशि प्रकाश, नवीन अरोड़ा, डीएल रत्नम, आयोग के परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ आदि ने विचार रखे।
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कार्यशाला में नहीं पहुंचे अध्यक्ष
कार्यशाला में आयोग के अध्यक्ष डॉ.अनुरूद्ध यादव शामिल नहीं हुए। चूंकि अध्यक्ष की कोशिश है कि पीसीएस-2017 से ही मुख्य परीक्षा में सिविल सेवा का प्रारूप लागू किया जाए। यह कार्यशाला भी इसी मुद्दे पर बुलाई गई थी। ऐसे में कार्यशाला में उनकी अनुपस्थिति से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अफसरों का यह भी कहना है कि अभी तक आयोग की ओर से शासन को नए प्रारूप के लिए प्रस्ताव भी नहीं भेजा गया है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि पीसीएस-2017 से ही सिविल सेवा का प्रारूप लागू कर पाना संभव नहीं है।
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पीसीएस मुख्य परीक्षा में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने तथा उसके सिलेबस का खाका तैयार करने के लिए आयोग में कार्यशाला आयोजित की गई। सिविल सेवा में चिकित्सा विज्ञान एक विषय के रूप में शामिल है। प्रतियोगी पीसीएस में भी इसे शामिल करने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को विशेषज्ञों ने भी इस पर सहमति जताई। अब इसका प्रस्ताव आयोग के सामने रखा जाएगा। विशेषज्ञाें का कहना था कि सामान्य अध्ययन का सिलेबस उत्तर प्रदेश पर केंद्रित होना चाहिए।
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यानी, सिलेबस और पेपर में उत्तर प्रदेश का अधिक भाग शामिल किया जाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि वैकल्पिक विषयों का सिलेबस वर्षों पुराना है, जबकि तकरीबन सभी विषयों में नई जानकारियां शामिल हो चुकी हैं। इसे ध्यान में रखकर सिलेबस को रिव्यू करने की जरूरत है। आयोग के सचिव अटल राय का कहना है कि कार्यशाला की रिपोर्ट आयोग के सामने रखी जाएगी। कार्यशाला में इलाहाबाद केंद्रीद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद, कमिश्नर राजन शुक्ला, आईपीएस, शशि प्रकाश, नवीन अरोड़ा, डीएल रत्नम, आयोग के परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ आदि ने विचार रखे।
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कार्यशाला में नहीं पहुंचे अध्यक्ष
कार्यशाला में आयोग के अध्यक्ष डॉ.अनुरूद्ध यादव शामिल नहीं हुए। चूंकि अध्यक्ष की कोशिश है कि पीसीएस-2017 से ही मुख्य परीक्षा में सिविल सेवा का प्रारूप लागू किया जाए। यह कार्यशाला भी इसी मुद्दे पर बुलाई गई थी। ऐसे में कार्यशाला में उनकी अनुपस्थिति से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अफसरों का यह भी कहना है कि अभी तक आयोग की ओर से शासन को नए प्रारूप के लिए प्रस्ताव भी नहीं भेजा गया है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि पीसीएस-2017 से ही सिविल सेवा का प्रारूप लागू कर पाना संभव नहीं है।