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सीबीआई के निशाने पर पीसीएस-2015
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:36 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सीबीआई ने तकरीबन छह सौ भर्ती परीक्षाओं के रिकार्ड कब्जे में ले लिए हैं, लेकिन निशाने पर प्रमुख दो-तीन बड़ी परीक्षाएं हैं। सीबीआई पीसीएस-2011 और पीसीएस-2015 को आधार बनाकर अपनी जांच शुरू कर सकती है। इसके अलावा पिछले दिनों जारी सहायक निजी सचिव (एपीएस) का परीक्षा परिणाम भी सीबीआई के निशाने पर होगा। सीबीआई के अफसरों को शुरुआती जांच में इन्हीं परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई पीसीएस-2011 और पीसीएस-2015 से अपनी जांच इसलिए शुरू करना चाहती है, क्योंकि प्रतियोगियों के आंदोलन की प्रमुख वजह यही दो परीक्षाएं थीं। पीसीएस-2011 में प्रतियोगियों के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे थे, जिनसे साबित हो रहा था कि परीक्षा में ओबीसी वर्ग के तहत जाति विशेष के अभ्यर्थियों का ही चयन किया गया है। ये दस्तावेज सीबीआई के पास पहुंच चुके हैं और इनका प्रारंभिक परीक्षण भी शुरू कर दिया गया है। पीसीएस-2015 भी सीबीआई के निशाने पर हैं, क्योंकि इसी परीक्षा में इतनी गड़बड़ियां हुईं कि आयोग को भी इन्हें स्वीकार करना पड़ा और चौतरफा घिरने के बाद आयोग को सुधार के लिए कई निर्णय लेने पड़े।
पीसीएस-2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर पेपर आउट हो गया था। परीक्षा 29 मार्च 2015 को आयोजित की गई थी। पहले पेपर की परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद 10 मई को परीक्षा दोबारा कराई गई। हालांकि, आयोग ने जैसे ही मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी किया, एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आ गई। जनसूचना अधिकार के एक मुख्य परीक्षा में असफल घोषित की गईं अभ्यर्थी डॉ. सुहासिनी बाजपेयी ने कॉपी देखने की मांग की। जांच हुई तो पता चला कि सुहासिनी के कॉपी का कोड बदल दिया गया था। बाद में सुहासिनी को मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया और उनके लिए अलग से इंटरव्यू का आयोजन किया गया, लेकिन उनका अंतिम रूप से चयन नहीं हो सका।
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गड़बड़ी खुलकर सामने आने के बाद आयोग ने सुधार के लिए कुछ निर्णय लिए। तय हुआ कि कॉपियों में अब बार कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। कॉपियों को स्कैन कर उन्हें डिजिटली सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही परीक्षा के दौरान पेपरों को बंडल खोले जाने और परीक्षा के बाद उसे सील किए जाने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। हालांकि, इनमें कुछ निर्णयों में पर अब तक अमल नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इन्हीं गड़बड़ियों के आधार बनाकर जांच शुरू करने जा रही है।
गोविंदपुर स्थित सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में शनिवार को भी कई प्रतियोगी सीबीआई अफसरों को भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली से जुड़े साक्ष्य देने पहुंचे। इस दौरान अफसरों ने कहा कि प्रतियोगियों के पास जो भी साक्ष्य हैं, बेझिझक उनको सौंप दें। सीबीआई के एक अफसर ने प्रतियोगियों को आश्वस्त किया कि अगर उनके साथ अन्याय हुआ है तो सीबीआई अदालत में प्रतियोगियों को क्लेम पर लाभ देने की मांग करेगी। अगर प्रतियोगी छात्र की शिकायत सही पाई जाती है तो सीबीआई की कोशिश होगी कि उस छात्र को संबंधित विज्ञापन के तहत चयनित करते हुए नौकरी दी जाए।
सीबीआई जिन बड़ी भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू करने जा रही है, उसके तहत कर्मचारी से लेकर एक्सपर्ट तक सभी पर सीबीआई की नजर है। सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे और जिन परीक्षाओं में सबसे अधिक गड़बड़ी मिलती है, वहां प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक आयोग के कर्मचारियों, अफसरों और एक्सपर्ट की भूमिका की जांच की जाएगी।
सीबीआई की टीम ने शनिवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में जांच के दौरान कंप्यूटर सेक्शन के कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक टीम ने कर्मचारियों से पूछा कि वहां कौन कर्मचारी कितने समय से तैनात है। साथ ही यह जानने की कोशिश भी की कि सीबीआई जांच के आदेश के बाद कंप्यूटर सेक्शन से कितने कर्मचारियों को इधर से उधर किया गया।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव को ज्ञापन देकर आयोग में चल रही सीबीआई जांच के लिए समर्थन मांगा गया। समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा किया कि भ्रष्टाचार का अड्डा बने यूपीपीएससी सीबीआई जांच के दायरे में है, लेकिन कुछ लोग जांच का विरोध कर रहे हैं। इस पर एसोसिएशन के अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी की ओर से सीबीआई जांच का समर्थन किया गया और प्रतियोगियों से कहा गया कि एसोसिएशन उनके साथ है।
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सूत्रों के मुताबिक सीबीआई पीसीएस-2011 और पीसीएस-2015 से अपनी जांच इसलिए शुरू करना चाहती है, क्योंकि प्रतियोगियों के आंदोलन की प्रमुख वजह यही दो परीक्षाएं थीं। पीसीएस-2011 में प्रतियोगियों के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे थे, जिनसे साबित हो रहा था कि परीक्षा में ओबीसी वर्ग के तहत जाति विशेष के अभ्यर्थियों का ही चयन किया गया है। ये दस्तावेज सीबीआई के पास पहुंच चुके हैं और इनका प्रारंभिक परीक्षण भी शुरू कर दिया गया है। पीसीएस-2015 भी सीबीआई के निशाने पर हैं, क्योंकि इसी परीक्षा में इतनी गड़बड़ियां हुईं कि आयोग को भी इन्हें स्वीकार करना पड़ा और चौतरफा घिरने के बाद आयोग को सुधार के लिए कई निर्णय लेने पड़े।
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पीसीएस-2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर पेपर आउट हो गया था। परीक्षा 29 मार्च 2015 को आयोजित की गई थी। पहले पेपर की परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद 10 मई को परीक्षा दोबारा कराई गई। हालांकि, आयोग ने जैसे ही मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी किया, एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आ गई। जनसूचना अधिकार के एक मुख्य परीक्षा में असफल घोषित की गईं अभ्यर्थी डॉ. सुहासिनी बाजपेयी ने कॉपी देखने की मांग की। जांच हुई तो पता चला कि सुहासिनी के कॉपी का कोड बदल दिया गया था। बाद में सुहासिनी को मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया और उनके लिए अलग से इंटरव्यू का आयोजन किया गया, लेकिन उनका अंतिम रूप से चयन नहीं हो सका।
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गड़बड़ी खुलकर सामने आने के बाद आयोग ने सुधार के लिए कुछ निर्णय लिए। तय हुआ कि कॉपियों में अब बार कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। कॉपियों को स्कैन कर उन्हें डिजिटली सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही परीक्षा के दौरान पेपरों को बंडल खोले जाने और परीक्षा के बाद उसे सील किए जाने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। हालांकि, इनमें कुछ निर्णयों में पर अब तक अमल नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इन्हीं गड़बड़ियों के आधार बनाकर जांच शुरू करने जा रही है।
गोविंदपुर स्थित सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में शनिवार को भी कई प्रतियोगी सीबीआई अफसरों को भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली से जुड़े साक्ष्य देने पहुंचे। इस दौरान अफसरों ने कहा कि प्रतियोगियों के पास जो भी साक्ष्य हैं, बेझिझक उनको सौंप दें। सीबीआई के एक अफसर ने प्रतियोगियों को आश्वस्त किया कि अगर उनके साथ अन्याय हुआ है तो सीबीआई अदालत में प्रतियोगियों को क्लेम पर लाभ देने की मांग करेगी। अगर प्रतियोगी छात्र की शिकायत सही पाई जाती है तो सीबीआई की कोशिश होगी कि उस छात्र को संबंधित विज्ञापन के तहत चयनित करते हुए नौकरी दी जाए।
सीबीआई जिन बड़ी भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू करने जा रही है, उसके तहत कर्मचारी से लेकर एक्सपर्ट तक सभी पर सीबीआई की नजर है। सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे और जिन परीक्षाओं में सबसे अधिक गड़बड़ी मिलती है, वहां प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक आयोग के कर्मचारियों, अफसरों और एक्सपर्ट की भूमिका की जांच की जाएगी।
सीबीआई की टीम ने शनिवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में जांच के दौरान कंप्यूटर सेक्शन के कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक टीम ने कर्मचारियों से पूछा कि वहां कौन कर्मचारी कितने समय से तैनात है। साथ ही यह जानने की कोशिश भी की कि सीबीआई जांच के आदेश के बाद कंप्यूटर सेक्शन से कितने कर्मचारियों को इधर से उधर किया गया।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव को ज्ञापन देकर आयोग में चल रही सीबीआई जांच के लिए समर्थन मांगा गया। समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा किया कि भ्रष्टाचार का अड्डा बने यूपीपीएससी सीबीआई जांच के दायरे में है, लेकिन कुछ लोग जांच का विरोध कर रहे हैं। इस पर एसोसिएशन के अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी की ओर से सीबीआई जांच का समर्थन किया गया और प्रतियोगियों से कहा गया कि एसोसिएशन उनके साथ है।