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किसी भी स्थिति में नहीं रोका जा सकता ग्रेच्युटी का भुगतान : हाईकोर्ट
Wed, 09 Dec 2020 07:16 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 09 Dec 2020 07:16 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी भी स्थिति में कर्मचारी की ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं रोका जा सकता है। यहां तक कि यदि कोर्ट द्वारा पारित डिक्री या अन्य किसी प्रकार से कर्मचारी की देनदारी साबित होती है तब भी उसकी प्रतिपूर्ति के लिए ग्रेच्युटी को संबद्ध नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कंपनी का एकाउंट एनपीए होने पर गारंटर बने बैंक कर्मी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने को अवैधानिक करार देते हुए बैंक को 15 दिन के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। बैंक कर्मचारी भूदेच त्रिवेदी की याचिका पर यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने दिया।
याची जय गोपाल इंटर प्राइजेज का गारंटर था। कंपनी का खाता एनपीए हो गया तो बैंक ने याची के रिटायर होने पर उसकी ग्रेच्युटी का भुगतान इस आधार पर रोक लिया कि गारंटर की भी जिम्मेदारी बनती है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।
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खंडपीठ ने कहा कि याची की सेवा नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान है जिसके आधार पर ग्रेच्युटी रोकी जा सके। पेंमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट में भी ग्रेच्युटी रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के सब सेक्शन (1) क्लाज (जी) के तहत ग्रेच्युटी को अटैच नहीं किया जा सकता है।
इस धारा के तहत ग्रेच्युटी को संबद्धता से इम्युनिटी प्राप्त है। यहां तक कि यदि किसी कोर्ट द्वारा पारित डिक्री अथवा किसी अन्य प्रकार से याची की देनदारी साबित भी होती है तो उसकी पूर्ति ग्रेच्युटी की रकम से नहीं की जा सकती है। भुगतान के लिए ग्रेच्युटी को संबद्ध नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने नियोक्ता बैंक को याची की ग्रेच्युटी का भुगतान 15 दिन के भीतर ब्याज सहित करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने कंपनी का एकाउंट एनपीए होने पर गारंटर बने बैंक कर्मी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने को अवैधानिक करार देते हुए बैंक को 15 दिन के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। बैंक कर्मचारी भूदेच त्रिवेदी की याचिका पर यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने दिया।
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याची जय गोपाल इंटर प्राइजेज का गारंटर था। कंपनी का खाता एनपीए हो गया तो बैंक ने याची के रिटायर होने पर उसकी ग्रेच्युटी का भुगतान इस आधार पर रोक लिया कि गारंटर की भी जिम्मेदारी बनती है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।
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खंडपीठ ने कहा कि याची की सेवा नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान है जिसके आधार पर ग्रेच्युटी रोकी जा सके। पेंमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट में भी ग्रेच्युटी रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के सब सेक्शन (1) क्लाज (जी) के तहत ग्रेच्युटी को अटैच नहीं किया जा सकता है।
इस धारा के तहत ग्रेच्युटी को संबद्धता से इम्युनिटी प्राप्त है। यहां तक कि यदि किसी कोर्ट द्वारा पारित डिक्री अथवा किसी अन्य प्रकार से याची की देनदारी साबित भी होती है तो उसकी पूर्ति ग्रेच्युटी की रकम से नहीं की जा सकती है। भुगतान के लिए ग्रेच्युटी को संबद्ध नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने नियोक्ता बैंक को याची की ग्रेच्युटी का भुगतान 15 दिन के भीतर ब्याज सहित करने का निर्देश दिया है।