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Allahabad High Court : बच्चों की खुशी के लिए मतभेदों को दूर करें माता-पिता

Thu, 22 Sep 2022 10:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 22 Sep 2022 10:17 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने ग्रंथ वर्मा की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में याची की मां अशी वर्मा ने आरोप लगाया कि उसका पति गौरव वर्मा ने उसके सात वर्षीय बच्चे को बंदी करके रखा है।

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Parents should remove differences for the happiness of children
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इटावा के दंपति के बीच आपसी रिश्तों में चल रहे मनमुटाव को देखते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि माता-पिता अपने बच्चों की खुशी और शांति के लिए आपसी मतभेदों को दूर करना चाहिए। जिससे कि वे अपनी इच्छाएं पूरी कर सकें। कोर्ट ने मामले में मां को उसके बेटों से मिलने में पिता द्वारा किसी तरह की रोक न लगाने का आदेश दिया। साथ ही जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे दोनों की काउंसलिंग कराएं जिससे कि उनके बीच के मतभेद दूर हो सकें।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने ग्रंथ वर्मा की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में याची की मां अशी वर्मा ने आरोप लगाया कि उसका पति गौरव वर्मा ने उसके सात वर्षीय बच्चे को बंदी करके रखा है। उनके जाने पर उनका पति दुर्व्यहार करता है और मिलने नहीं देता है। लिहाजा, उसे उसका बच्चा वापस दिलाया जाए।

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कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि पिता बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक है। बच्चा अपने पिता के घर अपने छोटे भाई केसाथ खुश है और वह वहीं रहकर पढ़ाई करना चाहता है। उसे अपने पिता से कोई शिकायत नहीं है। ऐसे में याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने मां को अपने बच्चों को मिलने से छूट दी। कहा कि पिता को भी इस पर आपत्ति नहीं है।

 

 

बशर्ते की मां जब मिलने जाए तो इसकी सूचना पहले देनी होगी। मां कभी भी किसी भी वक्त अपने बच्चों से मिल सकती है। कोर्ट ने माता और पिता को यह भी निर्देश दिया है कि वे किसी तहर का विवाद उत्पन्न नहीं करेंगे। कोर्ट ने इस निर्देश केसाथ याचिका को अस्वीकार कर दिया। 

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