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अभिभावक बोले, बंद हो स्कूलों में फीस वसूली

Mon, 06 Apr 2020 09:39 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2020 09:39 PM IST
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parents said fees should be closed in schools
कोरोना की वजह से प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन की ओर से अप्रैल, मई, जून की फीस वसूली पर रोक लगा दी गई है। इससे अलग प्रयागराज के अधिकतर पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूलों की ओर से अभिभावकों को नोटिस भेजकर ऑनलाइन फीस जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है। कई स्कूलों ने मासिक शुल्क में बढ़ोतरी करने के साथ यूनीफार्म और किताबें भी बदल दी है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी प्रयागराज से कोरोना के संकट के समय पूरे देश में लॉकडाउन से परेशानी को देखते हुए फीस जमा करने से छूट दिलाने की मांग की है।
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अभिभावकों का कहना है कि प्रदेश के नोएडा, वाराणसी, लखनऊ, गाजियाबाद, गोरखपुर जैसे जिले में वहां के जिलाधिकारियों ने कोरोना जैसी आपदा को ध्यान में रखकर स्कूलों को फीस नहीं लेने का निर्देश दिया है, वहीं अपने जिले में पूरा प्रशासन इस दिशा में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अभिभावक एचपी तिवारी का कहना है कि दूसरे जिले में जहां जिलाधिकारी के आदेश पर स्कूल वाले की फीस वसूली पर रोक लग गई है तो वहीं शहर के सीबीएसई से जुड़े एक नामी ग्रुप की ओर से फीस बढ़ाने के साथ अपने एक विद्यालय का ड्रेस भी बदल दिया गया। आलम यह है कि स्कूल की ओर से किताबें खरीदने के लिए एक पुस्तक विक्रेता का नाम भेजकर उसके यहां से किताबें खरीदने को दबाव बनाया जा रहा है। स्कूलों की ओर से इस प्रकार की मनमानी का अभिभावकों ने विरोध किया है।
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आईसीएसई से जुड़े शहर में छात्राओं के प्रमुख स्कूल की अेार से अपनी वेबसाइट पर सूचना जारी करने के साथ अभिभावकों को सूचना दी गई है कि वह 20 अप्रैल तक शुल्क जमा कर दें। हाईकोर्ट बार के उपाध्यक्ष अजय कुमार मिश्र ‘जयहिंद’ का कहना है कि इस महामारी की स्थिति में जब सरकार गरीबों को राशन एवं पैसा दे रही तो निजी स्कूलों का भी कर्तव्य बनता है कि वह बच्चों की तीन महीने की फीस माफ करें, गरीब बच्चों को नि:शुल्क कॉपी किताब और ड्रेस की भी व्यवस्था करवाएं। उन्होंने फीस जमा करने केलिए स्कूलों की ओर से नोटिस भेजे जाने का विरोध किया है। कहा है कि यदि जिला प्रशासन की ओर से इस दिशा में पहल नहीं की गई तो कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेंगे।
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कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकुंद तिवारी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौपंकर फीस माफ करने की मांग की है। उनका कहना है व्यापारियों का कारोबार ठप है, उनके पास तो कोरोना के खतरे को कम होने तक घर में बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, ऐसे में बच्चों की फीस भरने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। शहर के निजी स्कूल में पढ़ने वाले दो बच्चों की फीस जमा करने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से बच्चों की फीस माफ करने अथवा उसे तीन महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है।
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