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रामजन्मभूमि हमलाः पाकिस्तानी आतंकी थे हमले के मुख्य सूत्रधार

Sat, 22 Jun 2019 12:10 AM IST
विनोद सिंह योगेंद्र मिश्र, अमर उजाला, प्रयागराज
योगेंद्र मिश्र, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 22 Jun 2019 12:10 AM IST
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Pakistani terrorists were the main organizers of the attack
सांकेतिक तस्वीर
रामजन्म भूमि परिसर अयोध्या पर आतंकी हमले की घटना में पर्दे के पीछे असल हाथ पाकिस्तानी आतंकवादियों का था। पाकिस्तान में बैठे इनके आकाओं के इशारे पर जैश ए मोहम्मद के छह एरिया कमांडरों ने हमले को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी। रामजन्म भूमि पर हमले की योजना बनाने से लेकर हथियारों का इंतजाम करने, पैसे मुहैया कराने और हमले को अमली जामा पहनाने में इन्हीं कमांडरों का हाथ था। हमले की साजिश रचने में सजा पाने वाले चारों आतंकी आसिफ इकबाल उर्फ फार्रुख, मो. नसीम, शकील अहमद और डा. इरफान इन्हीं पाकिस्तानी आतंकियों के इशारे पर काम करते थे। हमले में शामिल पांच आतंकवादी मौके पर ही मारे गए थे, जबकि साजिश में शामिल छह आतंकी बाद में अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में सामने आए इन तथ्यों की पुष्टि भी हुई है। जांच में पता चला कि पाकिस्तान आतंकी सैफुल्लाह उर्फ कारी, जैश ए मोहम्मद का तहसील कमांडर उमर मेंडर इलाके का एरिया कमांडर था। आतंकी मुश्ताक, दंदल और दाउद की इस हमले को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से आपत्ति की गई कि पुलिस ने आतंकवादी उमर, दाउद, मुश्ताक, अदननान, दंदल और कारी के काल्पनिक नामों का सहारा लिया है जबकि यह आतंकी वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। इसके जवाब में अभियोजन ने एसएसपी सीआईडी जम्मू से मांगी गई सूचना कोर्ट में प्रस्तुत की।
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जम्मू पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक आतंकी उमर 23 अप्रैल 2008 को नेरुल बनोला सेक्टर मेंडर जिला पुंछ में सुरक्षा बलों से हुई मुठभेड़ में मारा गया था। आतंकी दाऊद को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था जबकि आतंकी दंदल भी मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आतंकी अदनान 14 अगस्त 2007 को सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में मारा गया था। अदालत को घटना के मुख्य सूत्रधार पाकिस्तानी आतंकी सैफुल्लाह उर्फ कारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाई गई जिसके मुताबिक वह भी गोली लगने से मारा गया था।
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अभियोजन के मुताबिक कारी ने ही आसिफ इकबाल को पैसे दिए थे जबकि जैश ए मोहम्मद के श्रीनगर कमांडर अदनान ने टाटा सूमो में कैविटी और बक्से बनवाए थे, जिनमें असलहे छिपाकर अलीगढ़ तक लाए गए। आतंकी दाउद ने एके 47 राफइलों और हैंडग्रेनेड का इंतजाम किया था। कारी ने आसिफ को अलीगढ़ जाने के लिए 13000 रुपये भी दिए थे। फार्रुख अलीगढ़ जाने से पहले पानीपत में मुश्ताक नाम के आतंकी से मिला, जिसने कुछ और असलहों का इंतजाम किया। अलीगढ़ पहुंचने पर मुश्ताक उसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर किसी मकान में ले गया। यहां सभी असलहे टाटा सूमो से उतार लिए गए और आसिफ  वापस जम्मू लौट आया। 

पुलिस को दिए बयान में आसिफ ने बताया कि जम्मू से असलहे लेकर अलीगढ़ जाते समय उसने रास्ते में सेना के कुछ जवानों को लिफ्ट दी थी ताकि किसी को उस पर शक न हो।


प्रयागराज। अयोध्या आतंकी हमले की घटना का राजफाश का जरिए सिर्फ एक मोबाइल फोन बना। इसी फोन ने साजिशकर्ताओं को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। हमले में मारे गए एक आतंकी की जेब से मिले नीले रंग के नोकिया मोबाइल सेट के आईईएमआई नंबर के सर्विलांस ने आतंकियों और साजिशकर्ताओं के बीच हुई बातचीत की कड़ियों आपस में जुड़ती चली गई। आतंकियों के मोबाइल में जिस सिम का इस्तेमाल किया गया था उसी सिम का इस्तेमाल डा. इरफान के मोबाइल सेट से भी हुआ था। आतंकी के मोबाइल में इस्तेमाल किए गए सभी आठ नंबर पुलिस ने हासिल कर लिए और इनका इस्तेमाल करने वालों तक पहुंच गई। साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने में भी यही सबसे अहम साक्ष्य भी साबित हुआ। 
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