कैंसर के इलाज में सोने से खरे पद्मश्री सोनकर के मोती, केरल के संस्थान को मुफ्त में भेजे गए बेशकीमती मोती
कृत्रिम मोती बनाकर दुनियाभर में सुर्खियां पाने वाले पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर के मोती अब कैंसर के इलाज में भी सोने से खरे सिद्ध होंगे। आयुष मंत्रालय की देखरेख में केरल स्थित सिद्ध क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान में हो रहे शोध के लिए डॉ. सोनकर ने बुधवार को ही लाखों रुपये मूल्य के 100 ग्राम मोती कोरियर किए हैं। उन्होंने यह मोती मुफ्त में उपलब्ध कराए हैं।
पद्मश्री डॉ. सोनकर ने 2010 में कैंसर के इलाज में मोती की उपयोगिता पर एक शोध पत्र लिखा था। इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा भी हुई, लेकिन तब शोध को आगे नहीं बढ़ाया गया। डॉ. सोनकर ने बताया था कि मोती में मिलने वाला जिंक कैंसर की कोशिकाओं के बेलगाम विखंडन को रोकने में कारगर है। साथ ही, मोती में पाए जाने वाले अन्य तत्वों तांबा, मैग्नीशियम, लोहा, कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम आदि भी इलाज में सहायक हैं।
अब आयुष विभाग की देखरेख में केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित सिद्ध क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान की ओर से कैंसर के इलाज में मोती के उपयोग पर रिसर्च शुरू हुआ है। इसके लिए संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. कंगाराजन ने डॉ. सोनकर से संपर्क किया। उन्होंने बजट नहीं होने की बात करते हुए सस्ते दर पर मोती उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उन्हें कुल 100 ग्राम मोती की जरूरत थी। डॉ. सोनकर ने यह मोती भेज दिए हैं।
विशेष परिस्थिति में तैयार हुए मोती
डॉ. अजय सोनकर बताते हैं कि समुद्र में प्रदूषण काफी बढ़ चुका है। लिहाजा, समुद्र में कहीं भी तैयार किए गए मोती का इस्तेमाल कैंसर के इलाज के लिए नहीं किया जा सकता है। उनके मुताबिक उन्होंने विशेष परिस्थिति में मोती तैयार किए हैं। इसके अलावा अंडमान निकोबार में समुद्र के अनछुए क्षेत्र में भी मोती तैयार किए जाते हैं। इसी वजह से उनके मोती की विशेष मांग है।
100 ग्राम के लिए हटाईं 3500 मोती से परतें
डॉ. सोनकर बताते हैं कि 100 ग्राम मोती बेशकीमती हैं। इनकी कीमत देखें तो यह लाखों में है। इन्हें जुटाने के लिए करीब 3500 मोती से परत हटानी पड़ी। चूंकि संस्थान का शोध व्यापक लोकहित से जुड़ा है, इसलिए यह मोती मुफ्त में उपलब्ध कराए गए हैं। शोध में अन्य तकनीकी सहयोग भी दिया गया है।