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Prayagraj News: जलभराव से धान की फसल बर्बाद
Sun, 30 Aug 2026 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sun, 30 Aug 2026 02:16 AM IST
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हरिसेनगंज-जलभराव के भेंट चढ़ी सैकड़ों एकड़ धान की फसल
मऊआइमा के कई गांवों में जलभराव से किसानों की धान की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। जलनिकासी का कोई स्थायी समाधान न होने से न सिर्फ खेत-खलिहान डूबे हैं, बल्कि कब्रिस्तानों में पानी भरने से अंतिम संस्कार तक में बाधा आ रही है।
क्षेत्र के सरायअलाउद्दीन उर्फ जोगापुर, मोहम्मदपुर सराय अली और सुल्तानपुर खास निवासी संजय, रामदास, रामराज, किशोरीलाल और ऋषि प्रजापति सहित कई किसानों ने बताया कि उनकी धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी होने के कारण सड़ गई है। फसल बर्बाद होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि महरौंडा, छितेमऊ, मानीउमरपुर, मोहम्मदपुर सराय अली, अलावलपुर आदि गांवों में पानी की निकासी मऊआइमा ब्लॉक स्थित रेलवे क्रॉसिंग के नीचे बनी पुलिया से होती है। पुलिया काफी छोटी होने से पानी का तेज बहाव नहीं हो पा रहा है। नतीजा, पानी गांवों और खेतों में भर जाता है।
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पीड़ित किसानों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर डीएम और मंडलायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि रेलवे क्रॉसिंग के नीचे बनी मौजूदा पुलिया को चौड़ा किया जाए और उसके पास में एक अतिरिक्त पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि जलनिकासी सुचारू हो सके और हर साल होने वाले नुकसान से बचा जा सके। जलभराव से स्कूल और अस्पताल सहित विकासखंड कार्यालय में बारिश का पानी घुस गया है।
क्षेत्र में 1.81 लाख हेक्टेयर में उत्पादन पर संकट
जलभराव ने धान का कटोरा कहे जाने वाले सोरांव तहसील का इलाका पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इस बार धान की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। गंगापार का सोरांव तहसील जिले में धान उत्पादन का मुख्य केंद्र है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनपद में इस बार खरीफ सीजन में करीब 1,81,280 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी, जिसका बड़ा हिस्सा सोरांव और मऊआइमा ब्लॉक में है।
पिछले साल भी 7000 किसान हुए थे बर्बाद
पिछले साल बाढ़ से जिले के 7008 किसानों की 1797.25 हेक्टेयर फसल बह गई थी। सबसे ज्यादा नुकसान सोरांव, बारा, मेजा और फूलपुर तहसील में हुआ था। प्रशासन ने तब 2.17 करोड़ की सहायता राशि का आकलन किया था। इस साल स्थिति और भयावह है।
सोरांव तहसील के दामोदरपुर, मऊदोस्तपुर, रामफलनारी आदि गांवों में धान की फसल खेतों में गिर गई। किसान रामलखन, शिवप्रसाद प्रजापति और अरविंद कुमार ने बताया कि इस बार धान की पैदावार 14-15 क्विंटल प्रति बीघा की उम्मीद थी, लेकिन अब 5-6 क्विंटल उत्पादन घट गया है। किसानों ने शासन से मांग की है कि लेखपाल और राजस्व टीम भेजकर सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए।
जहां भी जलभराव है। वहां स्थलीय मुआयना के बाद निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित गांव के लेखपालों को लगाया गया है। -भारती मीणा, एसडीएम, सोरांव
धान की फसल में लगातार 4-5 दिन तक जलभराव होने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे पौधे की नाइट्रोजन लेने की क्षमता खत्म हो जाती है और पौधा पीला पड़कर सड़ने लगता है। किसान तुरंत खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें और पानी निकलते ही दो किलोग्राम यूरिया व एक किलोग्राम जिंक प्रति बीघा का छिड़काव करें, ताकि पौधा रिकवर हो सके। -नरेंद्र मौर्या, कृषि वैज्ञानिक
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क्षेत्र के सरायअलाउद्दीन उर्फ जोगापुर, मोहम्मदपुर सराय अली और सुल्तानपुर खास निवासी संजय, रामदास, रामराज, किशोरीलाल और ऋषि प्रजापति सहित कई किसानों ने बताया कि उनकी धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी होने के कारण सड़ गई है। फसल बर्बाद होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
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ग्रामीणों का कहना है कि महरौंडा, छितेमऊ, मानीउमरपुर, मोहम्मदपुर सराय अली, अलावलपुर आदि गांवों में पानी की निकासी मऊआइमा ब्लॉक स्थित रेलवे क्रॉसिंग के नीचे बनी पुलिया से होती है। पुलिया काफी छोटी होने से पानी का तेज बहाव नहीं हो पा रहा है। नतीजा, पानी गांवों और खेतों में भर जाता है।
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पीड़ित किसानों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर डीएम और मंडलायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि रेलवे क्रॉसिंग के नीचे बनी मौजूदा पुलिया को चौड़ा किया जाए और उसके पास में एक अतिरिक्त पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि जलनिकासी सुचारू हो सके और हर साल होने वाले नुकसान से बचा जा सके। जलभराव से स्कूल और अस्पताल सहित विकासखंड कार्यालय में बारिश का पानी घुस गया है।
क्षेत्र में 1.81 लाख हेक्टेयर में उत्पादन पर संकट
जलभराव ने धान का कटोरा कहे जाने वाले सोरांव तहसील का इलाका पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इस बार धान की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। गंगापार का सोरांव तहसील जिले में धान उत्पादन का मुख्य केंद्र है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनपद में इस बार खरीफ सीजन में करीब 1,81,280 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी, जिसका बड़ा हिस्सा सोरांव और मऊआइमा ब्लॉक में है।
पिछले साल भी 7000 किसान हुए थे बर्बाद
पिछले साल बाढ़ से जिले के 7008 किसानों की 1797.25 हेक्टेयर फसल बह गई थी। सबसे ज्यादा नुकसान सोरांव, बारा, मेजा और फूलपुर तहसील में हुआ था। प्रशासन ने तब 2.17 करोड़ की सहायता राशि का आकलन किया था। इस साल स्थिति और भयावह है।
सोरांव तहसील के दामोदरपुर, मऊदोस्तपुर, रामफलनारी आदि गांवों में धान की फसल खेतों में गिर गई। किसान रामलखन, शिवप्रसाद प्रजापति और अरविंद कुमार ने बताया कि इस बार धान की पैदावार 14-15 क्विंटल प्रति बीघा की उम्मीद थी, लेकिन अब 5-6 क्विंटल उत्पादन घट गया है। किसानों ने शासन से मांग की है कि लेखपाल और राजस्व टीम भेजकर सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए।
जहां भी जलभराव है। वहां स्थलीय मुआयना के बाद निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित गांव के लेखपालों को लगाया गया है। -भारती मीणा, एसडीएम, सोरांव
धान की फसल में लगातार 4-5 दिन तक जलभराव होने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे पौधे की नाइट्रोजन लेने की क्षमता खत्म हो जाती है और पौधा पीला पड़कर सड़ने लगता है। किसान तुरंत खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें और पानी निकलते ही दो किलोग्राम यूरिया व एक किलोग्राम जिंक प्रति बीघा का छिड़काव करें, ताकि पौधा रिकवर हो सके। -नरेंद्र मौर्या, कृषि वैज्ञानिक