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हाईकोर्ट: समझौता विलेख के आधार पर नहीं हो सकता स्वमित्व का दावा, अमेरिका में रहने वाली महिला ने की थी शिकायत

Thu, 15 Jun 2023 05:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Jun 2023 05:48 PM IST
सार

प्रवासी महिला के बेटे का आरोप है कि उसकी मॉ विगत कई वर्षो से अमेरिका में रह रही हैं। आरोपियों ने उसकी मॉ के डिजिटल हस्ताक्षर से फर्जी समझौता विलेख की कूटरचना की और अराजक तत्वों की मदद से कानपुर नगर के आनंदपुरी स्थित मकान पर अवैध कब्जा कर लिया है। 

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Ownership cannot be claimed on the basis of agreement deed, FIR was lodged by a woman living in America
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपत्ति बिक्री के लिए निष्पादित समझौता विलेख के आधार पर स्वमित्व का दावा नहीं किया जा सकता है। यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्घार्थ ने याची के विरूद्घ दाखिल पूरक आरोप पत्र और विचारण न्यायालय द्वारा जारी तलबी आदेश को रद्द करते हुुए दिया। मामला कानपुर नगर के थाना जूही का है। वर्ष 2014 में अमेरिका में रहने वाली प्रवासी महिला द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के आधार पर नरेंद्र कुमार सिंह और कन्हेैया गुप्ता के विरूद्घ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

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प्रवासी महिला के बेटे का आरोप है कि उसकी मॉ विगत कई वर्षो से अमेरिका में रह रही हैं। आरोपियों ने उसकी मॉ के डिजिटल हस्ताक्षर से फर्जी समझौता विलेख की कूटरचना की और अराजक तत्वों की मदद से कानपुर नगर के आनंदपुरी स्थित मकान पर अवैध कब्जा कर लिया है। 
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मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने नरेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया और विचारण शुरू हो गया। विचारण के दौरान नरेंद्र के बयान से याची का नाम प्रकाश में आया और पुलिस ने अग्रिम विवेचना के आधार पर याची अजीत कुमार के विरूद्घ पूरक आरोप पत्र दाखिल कर दिया। पूरक आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए विचारण न्यायालय ने याची के विरूद्घ तलबी आदेश पारित कर दिया।

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 याची ने पूरक अरोप पत्र और तलबी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची के विरूद्घ दाखिल पूरक आरोप पत्र संबंधित मजिस्ट्रेट की पूर्वानुमति के बिना पुलिस द्वारा की गई अग्रिम विवेचना का परिणाम है। विवादित समझौता विलेख में याची का नाम गवाह के रूप में लिखा गया है, जबकि उस पर याची का हस्ताक्षर नहीं है। विवादित मकान पर न तो याची का कब्जा और न ही विवादित समझौता के आधार पर याची स्वामित्व का दावा कर रहा है। विवादित समझौता विलेख का लाभार्थी और सम्पत्ति का कब्जेदार नरेंद्र कुमार सिंह ही है। 

मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने दो विधिक बिन्दु पर महत्वपूर्ण विचार प्रकट किया। पहला यह  कि मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए विवेचना करना पुलिस का अधिकार है। कानूनी व्याख्या के अनुसार अग्रिम विवेचना के लिए मजिस्ट्रेट की पूर्वानुमति की कानूनी बाध्यता नहीं है। दूसरे विधिक बिन्दु को स्पष्टï करते हुए न्यायालय ने कहा कि संपत्ति की बिक्री के लिए निष्पादित समझौता विलेख, संपत्ति मेें स्वामित्व का अधिकार नहीं प्रदान करता।
 
उक्त विधि व्यवस्था निर्धारित करतेे हुए उच्च न्यायालय ने याची की याचिका को स्वीकार करते हुए विवादित सम्पत्ति का लाभार्थी नहीं माना और धोखाधड़ी के आरोप में दाखिल पूरक आरोप पत्र और विचारण न्यायालय द्वारा जारी तलबी आदेश को रद्ïद कर दिया। 

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