बकाया मांगा तो दिया वीआरएस का विकल्प

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 12 Oct 2015 01:38 AM IST
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इलाहाबाद। पराग डेयरी के कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य भत्तों के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। कर्मचारियों ने जब शासन से बकाये के भुगतान की मांग की तो शासन ने उन्होंने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने का विकल्प दे दिया है। कर्मचारियों को आवेदन के लिए 31 अक्तूबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि आदेश में कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य मदों के भुगतान के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों को आशंका है कि प्रबंधन उन्हें किसी तरह नौकरी से हटाना चाहता है ताकि बकाये का भुगतान न करना पड़ा।
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प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक अर्चना अग्रवाल की ओर से जारी आदेश के तहत डेयरी कर्मी भी वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं। पराग डेयरी में अचानक वीआरएस योजना लागू होने से कर्मचारियों में खलबली है, क्योंकि आदेश में कई चीजें स्पष्ट नहीं की गई हैं और कर्मचारी इसे अपने नुकसान के रूप में देख रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर वरिष्ठता के आधार पर अधिक आयु वाले कर्मचारियों को वीआरएस दिए जाने पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा।
जो कर्मचारी दस वर्ष की अनवरत सेवा पूरी कर चुका हो और और उसकी आयु 40 वर्ष की हो चुकी है, वही कर्मचारी वीआरएस के लिए अर्ह होगा। वीआरएस लेने पर कर्मचारी को खाते में जमा उपार्जित अवकाश के बराबर धनराशि का भुगतान, पीसीडीएफ में लागू ग्रेच्युटी योजना के अनुसार ग्रेच्युटी की धनराशि का भुगतान, जीएसएलआई के तहत देय धनराशि का भुगतान सहित अन्य लाभ दिए जाएंगे।
इस आदेश पर पीसीडीएफ ट्रेड यूनियन मंच के महामंत्री श्याम सुंदर शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रबंध निदेशक को ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने आदेश को अस्पष्ट बताते हुए उसमें संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि आदेश में कर्मचारियों के बकाया वेतन, भविष्य निधि एवं अन्य मदों में बकाया धनराशि के भुगतान का कोई जिक्र नहीं किया गया है। यह भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि लाभ पांचवें या छठवें वेतन आयोग के तहत दिया जाएगा। साथ ही यह स्पष्ट नहीं है कि वीआरएस सेवा नियमावली 2010 के अनुरूप या आदेश में अंकित शर्तों के अनुसार दिया जाएगा। इसके अलावा भी कई आदेश में कई पेच हैं, सो इसमें संशोधन किए जाने की आवश्यकता है।
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