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अकबर के किले में खोला गया मूल अक्षयवट
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प्रयागराज। संगम तट पर सविधि गंगा पूजन के बाद रविवार की दोपहर अकबर के किले में स्थित मूल अक्षयवट और सरस्वती कूप को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। इसी केसाथ अक्षयवट के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगने लगी है। फिलहाल सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन किए जा सकेंगे।
तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी की रिपोर्ट पर रास्ते की सफाई और मरम्मत के बाद अंतत: रविवार को मूल अक्षयवट को खो दिया गया। करीब 230 मीटर लंबे रास्ते की डबल लेन से लोग एक तरफ से जाएंगे और बैरीकेडिंग केबीच से अक्षयवट के दूर से दर्शन कर दूसरी तरफ से श्रद्धालु वापस किले केमुख्य द्वार पर पहुंचेंगे। यहां से पातालपुरी और फिर सरस्वती कूप होते हुए त्रिवेणी मार्ग पर निकास होगा। संगम तट पर निर्विघ्न माघ मेला के लिए गंगा पूजन के बाद सांसद केशरी देवी पटेल व डीएम भानुचंद्र गोस्वामी व अन्य अफसर सीधे किला द्वार पहुंचे। वहां भी सांसद व डीएम के सविधि पूजन के साथ ही मूल अक्षयवट का फाटक खोल दिया गया। इसके बाद अफसरों व साधु -संतों ने मूल अक्षयवट का दर्शन किया। सांसद ने इस मौके पर मूल अक्षयवट दर्शन की की शुरूआत की घोषणा की। इसके बाद डीएम और डीआईजी केपी सिंह ने श्रद्धालुओं की सुविधा की दृष्टि से किले में स्थित तीर्थों के दर्शन व अन्य तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अफसरों को हिदायत दी कि मूल अक्षयवट के दर्शन में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न होने पाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। अक्षयवट दर्शन आरंभ होने के साथ ही किले द्वार से प्रवेश और निकास समेत अन्य स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
अक्षयवट से किला परिसर तक की हर गतिविधि पर नजर
अक्षयवट से लेकर किला परिसर तक हर गतिविधियों को पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके लिए अक्षयवट व सरस्वती कूप के पथ पर एचडी कैमरे लगा दिए गए हैं। किले में प्रवेश करते ही हर व्यक्ति की गतिविधि कैमरे में कैद होने लगेगी। अक्षयवट चेक प्वाइंट के पास सामानों की जांच व तलाशी के बाद श्रद्धालुओं को भीतर प्रवेश दिया जा रहा है।
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तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी की रिपोर्ट पर रास्ते की सफाई और मरम्मत के बाद अंतत: रविवार को मूल अक्षयवट को खो दिया गया। करीब 230 मीटर लंबे रास्ते की डबल लेन से लोग एक तरफ से जाएंगे और बैरीकेडिंग केबीच से अक्षयवट के दूर से दर्शन कर दूसरी तरफ से श्रद्धालु वापस किले केमुख्य द्वार पर पहुंचेंगे। यहां से पातालपुरी और फिर सरस्वती कूप होते हुए त्रिवेणी मार्ग पर निकास होगा। संगम तट पर निर्विघ्न माघ मेला के लिए गंगा पूजन के बाद सांसद केशरी देवी पटेल व डीएम भानुचंद्र गोस्वामी व अन्य अफसर सीधे किला द्वार पहुंचे। वहां भी सांसद व डीएम के सविधि पूजन के साथ ही मूल अक्षयवट का फाटक खोल दिया गया। इसके बाद अफसरों व साधु -संतों ने मूल अक्षयवट का दर्शन किया। सांसद ने इस मौके पर मूल अक्षयवट दर्शन की की शुरूआत की घोषणा की। इसके बाद डीएम और डीआईजी केपी सिंह ने श्रद्धालुओं की सुविधा की दृष्टि से किले में स्थित तीर्थों के दर्शन व अन्य तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अफसरों को हिदायत दी कि मूल अक्षयवट के दर्शन में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न होने पाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। अक्षयवट दर्शन आरंभ होने के साथ ही किले द्वार से प्रवेश और निकास समेत अन्य स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
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अक्षयवट से किला परिसर तक की हर गतिविधि पर नजर
अक्षयवट से लेकर किला परिसर तक हर गतिविधियों को पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके लिए अक्षयवट व सरस्वती कूप के पथ पर एचडी कैमरे लगा दिए गए हैं। किले में प्रवेश करते ही हर व्यक्ति की गतिविधि कैमरे में कैद होने लगेगी। अक्षयवट चेक प्वाइंट के पास सामानों की जांच व तलाशी के बाद श्रद्धालुओं को भीतर प्रवेश दिया जा रहा है।
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