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High Court : शुआट्स का कोर्स बंद करने और शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश सही
Fri, 27 Feb 2026 03:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 27 Feb 2026 03:04 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) की ओर से कोर्स बंद करने और शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश को सही माना है।
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शुआट्स।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) की ओर से कोर्स बंद करने और शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश को सही माना है। शुआट्स को आदेश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर शासन के समक्ष अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। साथ ही न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने राज्य सरकार को भी तीन सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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विवि की ओर से कहा गया कि चार–पांच साल में स्ववित्तपोषित इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या 90 प्रतिशत तक घटने से आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। विभिन्न समितियों की रिपोर्ट, अकादमिक काउंसिल, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और बाद में सीनेट की स्वीकृति के बाद मार्च 2025 में कुछ स्ववित्तपोषित इंजीनियरिंग विभागों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इसके परिणामस्वरूप एक जुलाई 2025 से संबंधित प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
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प्रोफेसरों की ओर से दलील दी गई कि पाठ्यक्रम समाप्त करने की प्रक्रिया विधिसम्मत ढंग से नहीं अपनाई गई। सीनेट ने स्वतंत्र निर्णय लेने के बजाय केवल रिपोर्टों पर मुहर लगाई। विवि समग्र रूप से लाभ में है। इसलिए अन्य पाठ्यक्रमों के लाभ से वेतन का भुगतान किया जा सकता था।
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राज्य सरकार ने भी प्रोफेसरों के पक्ष का समर्थन कर कहा कि उसे अधिनियम-2016 की धारा-42 और 55 के तहत नीतिगत मामलों में निर्देश देने और जानकारी मांगने का अधिकार है। तीन फरवरी 2026 को राज्य ने विश्वविद्यालय के निर्णय पर रोक लगाते हुए प्रोफेसरों को कार्य करने और वेतन देने के निर्देश दिए थे। विश्वविद्यालय ने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए चुनौती दी थी।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया पाठ्यक्रम बंद करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं दिखती। साथ ही सीनेट की ओर से लिए गए निर्णय का अनुमोदन अवैध नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत स्वतंत्र रूप से जांच करने का अधिकार है कि निर्णय सही तथ्यों पर आधारित था या नहीं। क्योंकि, मामला राज्य के समक्ष विचाराधीन है। इसलिए इस चरण पर अदालत निर्णय के गुण-दोष में नहीं जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय को इस मुद्दे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रोफेसर पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत हैं। यदि परिस्थितियां अनुकूल हों तो उन्हें अन्य पाठ्यक्रमों में समायोजित करने या एकमुश्त मुआवजा या समझौते की योजना पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं उपरोक्त निर्देशों के साथ निस्तारित कर दीं।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया पाठ्यक्रम बंद करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं दिखती। साथ ही सीनेट की ओर से लिए गए निर्णय का अनुमोदन अवैध नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत स्वतंत्र रूप से जांच करने का अधिकार है कि निर्णय सही तथ्यों पर आधारित था या नहीं। क्योंकि, मामला राज्य के समक्ष विचाराधीन है। इसलिए इस चरण पर अदालत निर्णय के गुण-दोष में नहीं जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय को इस मुद्दे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रोफेसर पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत हैं। यदि परिस्थितियां अनुकूल हों तो उन्हें अन्य पाठ्यक्रमों में समायोजित करने या एकमुश्त मुआवजा या समझौते की योजना पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं उपरोक्त निर्देशों के साथ निस्तारित कर दीं।