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Prayagraj News: राजकीय महाविद्यालय गुनई गहरपुर का संचालन विवादों में, छात्र परेशान
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ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा देने के लिए सत्र 2023-24 में राजकीय महाविद्यालय गुनई गहरपुर मेजा की शुरुआत छह विद्यार्थियों से हुई थी। इसके संचालन की जिम्मेदारी प्रो. राजेंद्र सिंह राज्य विश्वविद्यालय को सौंपी गई थी, लेकिन पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका।
नए सत्र जुलाई से इसका संचालन होगा या नहीं, यह तय नहीं है। राज्य विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रूप से संचालन करने से मना कर दिया है। उधर, उच्च शिक्षा निदेशालय केवल तैयारी करने का दावा कर रहा है। राज्य विश्वविद्यालय को इसे अपने संसाधनों से संघटक महाविद्यालय के रूप में चलाना था।
सरकार ने बीच में महाविद्यालय का संचालन अपने स्तर पर करने का निर्णय लिया था। शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई, लेकिन कुछ दिन बाद यह निर्णय वापस ले लिया गया। अब राज्य विश्वविद्यालय भी इसे चलाने के लिए तैयार नहीं है। उच्च शिक्षा निदेशालय और विश्वविद्यालय एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।
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शिक्षकों का अभाव और नुकसान
सत्र 2023-24 में यह महाविद्यालय छह विद्यार्थियों से शुरू हुआ था। सत्र 2025-26 तक छात्रों की संख्या 31 हो गई। हालांकि, महाविद्यालय में किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं हुई। उच्च शिक्षा निदेशालय ने नियुक्त शिक्षकों को वापस बुला लिया। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह महाविद्यालय अब किसी काम का नहीं रह गया है।
प्रयोगशाला की दुर्दशा और सीटें
महाविद्यालय के विज्ञान संकाय की प्रयोगशाला में उपकरण धूल फांक रहे हैं। कुर्सियां भी बैठने लायक नहीं हैं और कई उपकरण खराब हो चुके हैं। महाविद्यालय में बीए, बीएससी और बीकॉम की कुल 540 सीटें हैं। इनमें बीए की 180, बीएससी की 240 और कॉमर्स की 120 सीटें शामिल हैं। कुलपति अखिलेश कुमार सिंह ने सरकार से संचालन अपने स्तर पर कराने का आग्रह किया है। सहायक निदेशक बीएल शर्मा ने कहा कि जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
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नए सत्र जुलाई से इसका संचालन होगा या नहीं, यह तय नहीं है। राज्य विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रूप से संचालन करने से मना कर दिया है। उधर, उच्च शिक्षा निदेशालय केवल तैयारी करने का दावा कर रहा है। राज्य विश्वविद्यालय को इसे अपने संसाधनों से संघटक महाविद्यालय के रूप में चलाना था।
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सरकार ने बीच में महाविद्यालय का संचालन अपने स्तर पर करने का निर्णय लिया था। शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई, लेकिन कुछ दिन बाद यह निर्णय वापस ले लिया गया। अब राज्य विश्वविद्यालय भी इसे चलाने के लिए तैयार नहीं है। उच्च शिक्षा निदेशालय और विश्वविद्यालय एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।
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शिक्षकों का अभाव और नुकसान
सत्र 2023-24 में यह महाविद्यालय छह विद्यार्थियों से शुरू हुआ था। सत्र 2025-26 तक छात्रों की संख्या 31 हो गई। हालांकि, महाविद्यालय में किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं हुई। उच्च शिक्षा निदेशालय ने नियुक्त शिक्षकों को वापस बुला लिया। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह महाविद्यालय अब किसी काम का नहीं रह गया है।
प्रयोगशाला की दुर्दशा और सीटें
महाविद्यालय के विज्ञान संकाय की प्रयोगशाला में उपकरण धूल फांक रहे हैं। कुर्सियां भी बैठने लायक नहीं हैं और कई उपकरण खराब हो चुके हैं। महाविद्यालय में बीए, बीएससी और बीकॉम की कुल 540 सीटें हैं। इनमें बीए की 180, बीएससी की 240 और कॉमर्स की 120 सीटें शामिल हैं। कुलपति अखिलेश कुमार सिंह ने सरकार से संचालन अपने स्तर पर कराने का आग्रह किया है। सहायक निदेशक बीएल शर्मा ने कहा कि जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा।