ओपीडी, इमरजेंसी से लौटाए गए हजारों मरीज
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पीजी प्रवेश परीक्षा में पीएमएस संवर्ग को 30 फीसदी अतिरिक्त नंबर दिए जाने का विरोध कर रहे मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र मांगें पूरी होने तक हड़ताल से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजते ओपीडी खुलने का समय हुआ तो बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंच गए और ओपीडी पर ताला जड़ दिया। ऐसे में इलाहाबाद समेत कौशाम्बी, प्रतापगढ़ एवं आसपास के जिलों से आए मरीजों को बिना इलाज कराए वहां से लौटना पड़ा। ओपीडी बंद होने के कारण सीरियर डॉक्टर नहीं बैठ सके, ऐसे में उन मरीजों को जांच के लिए भी नहीं लिखा जा सके, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत थी। हड़ताल के कारण उन अस्पताल के उन कमरों में भी ताला लगा रहा, जहां जांचें होती हैं।
हड़ताली छात्रों का एक गुट दिनभर इमजरेंसी के बाहर धरना दिए बैठा रहा, सो इमरजेंसी में भी नए मरीजों का प्रवेश नहीं लिया गया और गंभीर मरीजों को भी वहां से लौटा दिया गया। ऑपरेशन भी सिर्फ गंभीर मरीजों का हुआ। उधर, दोपहर 12 बजे छात्रों ने अस्पताल परिसर के आसपास स्थित दवा की दुकानें भी बंद करा दीं, इससे अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों के लिए भी मुसीबत बढ़ गई। तीमारदारों को अपने-अपने मरीज के लिए दवा खरीदने के लिए वहां से काफी दूर जाना पड़ा। दवा खरीदने में काफी दिक्कत भी हुई, क्योंकि एसआरएन के ज्यादातर डॉक्टर वही दवाएं लिखते हैं जो आसपास के मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध हैं। कमीशन के इस खेल ने हड़ताल के दौरान मरीजों के लिए मुसीबत और बढ़ा दी है।
एसआरएन अस्पताल में हड़ताल कोई नई बात नहीं है। हड़ताल के लिए वहां मुद्दों की कमी नहीं है। कभी मेडिकल छात्र तो कभी जूनियर या सीनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर चले जाते हैं और भुगतना पड़ता है सिर्फ मरीजों को। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। पीजी प्रवेश परीक्षा को लेकर जो भी विवाद हो, इससे मरीजों का कोई लेनादेना नहीं। इसके बावजूद मंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ओपीडी ठप है और इमरजेंसी में मरीज नहीं लिए जा रहे हैं। जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन ने भी मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया है और अफसर चुपचाप बैठकर तमाश देख रहे हैं।