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महाष्टमी पर कोरोना संकट से मुक्ति को मांगा आशीर्वाद

Wed, 01 Apr 2020 10:15 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2020 10:15 PM IST
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on mahashtmi  seek blessings for freedom from corona crisis
on mahashtmi seek blessings for freedom from corona crisis - फोटो : CITY DESK
वासंतिक नवरात्र के तहत बुधवार को महाअष्टमी पर घरों, मंदिरों और शक्तिपीठों, सिद्धपीठों में भगवती की पूजा आराधना की गई। मंदिरों, पीठों में श्रद्धालुओं की उपस्थिति नहीं रही लेकिन पुजारियों की ओर से सिद्धपीठ ललिता देवी, सिद्धपीठ कल्याणी देवी और सिद्धपीठ अलोपीदेवी में देवी का महागौरी स्वरूप में शृंगार किया गया। भगवती की भव्य झांकियां सजीं। मीरापुर स्थित शक्तिपीठ ललिता देवी और कल्याणी देवी स्थित सिद्धपीठ कल्याणी देवी में मंगला आरती के बाद पूजन, अभिषेक किया गया। शाम को भगवती का गेंदा, गुलाब और गुड़हल के फूलों तथा सोने-चांदी के आभूषणों से मनोरम शृंगार किया गया।
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सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और धीरज नागर, कल्याणी देवी में पंडित श्यामजी पाठक, अलोपीदेवी में महानिर्वाणी अखाड़े के महंतों और चौक गंगादास स्थित खेमामाई नवदुर्गा मंदिर में कंचन मालवीय की देखरेख में भगवती से कोरोना जैसी महामारी से निजात दिलाने सहित श्रद्धालुओं को स्वस्थ रखने और सर्वमंगल के लिए प्रार्थना की गई।
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सिद्धपीठों के साथ ही घरों में भी शतचंडी पाठ की पूर्णाहुति हुई। दुर्गासप्तशती का पाठ करके कोरोना संकट से मुक्ति दिलाने के लिए आशीष मांगा गया। शाम को शयन आरती उतारने के साथ देवी के कपाट बंद हुए। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के आचार्यत्व में महाअष्टमी पर विश्वशांति और कोरोना संकट के यथाशीघ्र समाप्ति की कामना से सप्तशती के मंत्रों से याज्ञिक अनुष्ठान किया गया।
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रखा अष्टमी व्रत, पारण आज
नौ दिनों का व्रत रखने वालों से इतर चढ़ता-उतरता की मान्यता वालों ने प्रतिपदा के बाद बुधवार को महाअष्टमी का व्रत रखा। देवी की पूजा आराधना की गई और उन्हें भी व्रत की सामग्री से ही भोग लगाया गया। वृहस्पतिवार, दो अप्रैल को देवी के नवम सिद्धिदात्री स्वरूप के पूजन और हवन के बाद 3 अप्रैल को सुबह पारण किया जाएगा। ज्योतिर्विद् पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक नवमी तिथि बुधवार की रात 9.50 बजे से आरंभ होकर बृहस्पतिवार को रात 8.46 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में पूर्णाहुति की जाएगी। ध्यान रहे 1.30 से तीन बजे तक राहुकाल में हवन करना उचित नहीं है।

पांव पखारकर खिलाई गईं कन्याएं
महासप्तमी का पूजन और व्रत रखने वाली श्रद्धालुओं ने महाअष्टमी पर बारी-बारी से कन्याओं को भोज कराया। अबकी मंदिरों में कन्या भोज के लिए जमावड़ा नहीं हुआ लेकिन घरों में पास-पड़ोस की कन्याओं को बारी-बारी पांव पखारने के बाद फल-मिठाई या दही-पूड़ी खिलाई गई। भोर संस्था की सचिव श्वेता श्रीवास्तव ने कहा, सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखते हुए परिवार और पड़ोस की कन्याओं को भोज कराया गया। अष्टमी का व्रत रखने वाले नवमी को कन्याएं खिलाएंगे।

on mahashtmi  seek blessings for freedom from corona crisis

on mahashtmi seek blessings for freedom from corona crisis- फोटो : CITY DESK

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on mahashtmi seek blessings for freedom from corona crisis- फोटो : CITY DESK

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