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अफसरों की गलती, सजा भुगत रहे अभ्यर्थी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 12 Jun 2018 12:51 AM IST
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भर्ती विज्ञापन में दिए गए सभी नियमों का पालन किया। निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन पाया। कहीं कोई गलती नहीं फिर भी ‘सजा’ झेलने को मजबूर। प्रशिक्षण चल ही रहा था कि बिना कोई कारण बताए घर भेज दिया गया। यह हालत है पिछले दिनों जिले में हुई होमगार्ड भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों की। अब वह इधर उधर भटकने को मजबूर हैं।
शासन के आदेश पर जिले में 85 होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती प्रक्रिया मार्च 2018 में शुरू हुई थी। ऑनलाइन आवेदन के बाद अप्रैल में ही दस्तावेजों की जांच, फिजिकल के बाद चयनितों की अनंतिम सूची जारी कर दी गई। 16 व17 अप्रैल को सीएमओ कार्यालय में मेडिकल हुआ और इसके बाद 29 अप्रैल को अंतिम सूची जारी हुई। इसमें कुल 70 लोगों का नाम शामिल था जिनमें से 30 ग्रामीण, 38 शहरी एवं दो महिला अभ्यर्थी शामिल थीं। चयनित अभ्यर्थियों नैनी निवासी विष्णुधर, सैदाबाद निवासी शिवजी, राजरूपपुर निवासी सचिन, तेलियरगंज निवासी सूबेदार व विवेक और झूंसी निवासी बृजेश मिश्रा का कहना है कि एक मई से शहरी स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण रिजर्व पुलिस लाइन और ग्रामीण स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण डीटीसी झूंसी में शुरू हुआ। आरोप है कि 10 मई को बिना कोई कारण बताए प्रशिक्षण रोक दिया गया।
साथ ही अभ्यर्थियों को यह कहते हुए घर भेज दिया गया कि प्रशिक्षण के लिए बाद में बुलाया जाएगा। हालांकि 11 मई को मीडिया में आई खबरों से मालूम हुआ कि अनियमितता के आरोप में भर्ती निरस्त कर दी गई है। साथ ही गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन कमांडेंट प्रियव्रत सिंह को निलंबित करने के साथ ही डिप्टी कमांडेंट जनरल एसी उपाध्याय को भी हटा दिया गया। उधर चयनित अभ्यर्थी तब से इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने नियमानुसार आवेदन किया। साथ ही नियमानुसार पूरी प्रक्रिया में शामिल होेते हुए उन्होंने चयन पाया। अनियमितता अफसरों के स्तर से हुई तो इसकी सजा उन्हें क्यों दी गई। इस बारे में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बताया कि जब वह अपनी शिकायत लेकर मौजूदा कमांडेंट के पास गए तो उन्होंने कहा कि भर्ती शासन की ओर से निरस्त की गई है। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बता सकते। इस संबंध में कमांडेंट से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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शासन के आदेश पर जिले में 85 होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती प्रक्रिया मार्च 2018 में शुरू हुई थी। ऑनलाइन आवेदन के बाद अप्रैल में ही दस्तावेजों की जांच, फिजिकल के बाद चयनितों की अनंतिम सूची जारी कर दी गई। 16 व17 अप्रैल को सीएमओ कार्यालय में मेडिकल हुआ और इसके बाद 29 अप्रैल को अंतिम सूची जारी हुई। इसमें कुल 70 लोगों का नाम शामिल था जिनमें से 30 ग्रामीण, 38 शहरी एवं दो महिला अभ्यर्थी शामिल थीं। चयनित अभ्यर्थियों नैनी निवासी विष्णुधर, सैदाबाद निवासी शिवजी, राजरूपपुर निवासी सचिन, तेलियरगंज निवासी सूबेदार व विवेक और झूंसी निवासी बृजेश मिश्रा का कहना है कि एक मई से शहरी स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण रिजर्व पुलिस लाइन और ग्रामीण स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण डीटीसी झूंसी में शुरू हुआ। आरोप है कि 10 मई को बिना कोई कारण बताए प्रशिक्षण रोक दिया गया।
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साथ ही अभ्यर्थियों को यह कहते हुए घर भेज दिया गया कि प्रशिक्षण के लिए बाद में बुलाया जाएगा। हालांकि 11 मई को मीडिया में आई खबरों से मालूम हुआ कि अनियमितता के आरोप में भर्ती निरस्त कर दी गई है। साथ ही गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन कमांडेंट प्रियव्रत सिंह को निलंबित करने के साथ ही डिप्टी कमांडेंट जनरल एसी उपाध्याय को भी हटा दिया गया। उधर चयनित अभ्यर्थी तब से इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने नियमानुसार आवेदन किया। साथ ही नियमानुसार पूरी प्रक्रिया में शामिल होेते हुए उन्होंने चयन पाया। अनियमितता अफसरों के स्तर से हुई तो इसकी सजा उन्हें क्यों दी गई। इस बारे में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बताया कि जब वह अपनी शिकायत लेकर मौजूदा कमांडेंट के पास गए तो उन्होंने कहा कि भर्ती शासन की ओर से निरस्त की गई है। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बता सकते। इस संबंध में कमांडेंट से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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