Odisha Train Accident : बालासोर रेल हादसे के बाद अब एनसीआर तेजी से करेगा ‘कवच’ पर काम, रेलवे ने कसी कमर
ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर रोकने और सुरक्षित परिचालन के लिए एनसीआर की तैयारी है कि जोन से गुजरने वाले दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई को अगले एक वर्ष में हर हाल में ‘कवच’ प्रणाली से लैस कर दिया जाए।
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ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे की पुनरावृत्ति आगे न हो इस मुहिम में रेलवे की ‘कवच’ प्रणाली पर उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) अब तेजी से काम करेगा। ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर रोकने और सुरक्षित परिचालन के लिए एनसीआर की तैयारी है कि जोन से गुजरने वाले दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई को अगले एक वर्ष में हर हाल में ‘कवच’ प्रणाली से लैस कर दिया जाए।
बताया जा रहा है कि बालासोर में जिस स्थान पर हादसा हुआ, उस रूट पर ‘कवच’ प्रणाली नहीं थी। अगर उक्त रूट कवच से लैस होता तो एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आ जाने की स्थिति में हादसा न हो पाता। रेलवे अफसरों का कहना है कि रेलवे द्वारा सभी महत्वपूर्ण रेल मार्ग में कवच (एंटी-ट्रेन टक्कर प्रणाली) स्थापित करने की प्रक्रिया में है। दरअसल कवच लोको पॉयलट को उस वक्त अलर्ट करता है जब वह किसी सिग्नल (सिग्नल पासड एट डेंजर - स्पैड) को पार कर जाता है।
अमूमन ट्रेन की टक्करों की प्रमुख वजह यही रहती है। इस तकनीक में जब ऐसे सिग्नल से ट्रेन गुजरती है, जहां से गुजरने की अनुमति नहीं होती है तो इसके जरिये खतरे वाला सिग्नल भेजा जाता है। साथ ही लोको पायलट अगर ट्रेन को रोकने में विफल साबित होता है तो फिर ‘कवच’ तकनीक के जरिए से अपने आप ट्रेन के ब्रेक लग जाते हैं और हादसे से ट्रेन बच जाती है।
पिछले वर्ष ही इसका ट्रायल रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने तत्कालीन चेयरमैन वीके त्रिपाठी के साथ किया था। इसके बाद ही तय हुआ था कि सबसे पहले इस प्रणाली का उपयोग दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रूट पर होगा। दिल्ली-हावड़ा रूट का आधा भाग प्रयागराज मंडल से ही गुजरता है। अब बालासोर हादसे के एनसीआर से गुजरने वाले देश के दो महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर यह काम रफ्तार पकड़ेगा। प्रयागराज मंडल में कवच लगाने का काम दो चरण में होगा। पहले चरण में छिपियाना बुजुर्ग से कानपुर (लागत- 179.95 करोड़) एवं दूसरे चरण में कानपुर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जं (लागत- 178.96 करोड़) रुपये में यह प्रणाली यहां लगाई जाएगी।
ओडीसा में हुआ हादसा दुखद है। कवच प्रणाली का काम एनसीआर में तेजी से चल रहा है। मथुरा-पलवल सेक्शन में 65 किमी क्षेत्र में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है। छिपियाना बुजुर्ग से कानपुर के बीच भी इसे लगाया जा रहा है। यह मिशन रफ्तार का ही प्रोजेक्ट है। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, एनसीआर।
हादसे की वजह से आज नहीं आएगी पुरुषोत्तम, कई ट्रेनों के बदले गए रास्ते
ओडीशा में हुए रेल हादसे की वजह से प्रयागराज आने वाली ट्रेनों के भी संचालन पर असर पड़ा है। बालासोर हादसे के चलते शनिवार को 12801 पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पुरी से ही निरस्त कर दी गई। ऐसे में अब रविवार की शाम पुरुषोत्तम एक्सप्रेस प्रयागराज जंक्शन नहीं आएगी।
इसके अलावा 22812 नई दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस एवं 12816 नंदन कानन एक्सप्रेस का रूट बदल दिया गया। प्रयागराज आने के बाद राजधानी को नेता जी सुभाषचंद्र बोस गोमो, चक्रधरपुर, जरोली, नयागढ़ के रास्ते भेजा गया। इसी तरह प्रयागराज आने वाली 12815 नंदन कानन एक्सप्रेस, 12801 जखापुरा-जारोली के रास्ते आई। रविवार को भी 12815 नंदन कानन एक्सप्रेस जखापुरा-जारोली के रास्ते प्रयागराज पहुंचेंगी।
ऐसे में यहां यह विलंब से भी पहुंच सकती है। वहीं दूसरी ओर 22824 नई दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस चानदिल, सिनी जंक्शन, चक्रधरपुर, राउरकेला के रास्ते शनिवार की रात संचालित की गई। उधर चार जून को भुवनेश्वर से चलनी वाली 22811 राजधानी एक्सप्रेस भी राउरकेला होकर प्रयागराज पांच जून की रात को आएगी।