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अब छोटे नोट भी बने बोझ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 09 Sep 2017 01:32 AM IST
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बैंक सिक्कों के बाद अब दस रुपये के नोट लेने में आनाकानी कर रहे हैं। इसको लेकर आए दिन व्यापारियों और बैंक अफसरों में नोंकझोंक की घटनाएं हो रही हैं। व्यापारियों में इस बात को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि उनके पास पहले से ही लाखों के सिक्के जमा हो गए हैं, ऐसे में बैंकों द्वारा दस के नोट न लेने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
नोटबंदी के बाद नष्ट करने के लिए बैंकों में जमा 10 तथा अन्य मूल्य के छोटे नोटों के बंडल भी बाहर हो गए। वे नोट अब भी चलन में बने हुए हैं। इसकी वजह से बाजार में इनकी भरमार हो गई है। इसके अलावा 10 के सिक्कों की भी बहुलता है, जो बैंकों और व्यापारियों के साथ आम लोगों के भी परेशानी का कारण बन गए हैं। साथ में विवाद का भी। बैंक 10 के नोट लेने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि शाखा में 10 के नोट रखने के लिए जगह नहीं है। इसके विरोध में बैंक ऑफ बड़ौदा की कीडगंज शाखा समेत कई अन्य बैंकों में भी व्यापारी धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। व्यापारी सतीश केसरवानी का कहना है कि व्यापारियों के पास लाखों रुपये के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। अब 10 के नोट भी डंप होने लगे हैं। संतोष पनामा का कहना है कि आखिर वे 10 के नोट कहां ले जाएं। वहीं अग्रणी बैंक प्रबंधक रामजी का कहना है कि आरबीआई के निर्देश के अनुसार बैंक नोट लेने से मना नहीं कर सकते, लेकिन शाखाओं में नोट रखने के लिए स्थान सीमित है। ऐसे में कुछ दिक्कत है लेकिन नोट लिए जा रहे हैं।
सिक्कों और छोटे मूल्य के नोट बैंकों में नहीं लिए जाने से व्यापार की शुरुआत करने वाले युवाओं की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। बिजनेस शुरू करने के लिए अब उन्हें सिक्काें तथा छोटे मूल्य के नोट के लिए अलग से बजट का इंतजाम करना होगा। जनरल मर्चेंट की दुकान खोलने वाले बेली के बालकृष्ण जायसवाल का कहना है कि बड़ी संख्या में सिक्के और 10 के नोट जमा हो गए हैं। ग्राहकों को एक-दो नोट देकर बोझ कुछ कम करने की कोशिश की जाती है, लेकिन उससे कहीं अधिक नोट आ जाते हैं। ऐसे में बैंकों के नोट नहीं लेने से उनके व्यापार बुरा असर पड़ रहा है।
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नकली सिक्कों को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है। एक रुपये के छोटे तथा 10 रुपये के एक खास तरह के सिक्के को नकली बताकर दुकानदार लेने से मना कर दे रहे हैं। जबकि, आरबीआई का स्पष्टीकरण आ चुका है कि हर तरह के सिक्के चलन में हैं। कोई सिक्का नकली नहीं है।
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नोटबंदी के बाद नष्ट करने के लिए बैंकों में जमा 10 तथा अन्य मूल्य के छोटे नोटों के बंडल भी बाहर हो गए। वे नोट अब भी चलन में बने हुए हैं। इसकी वजह से बाजार में इनकी भरमार हो गई है। इसके अलावा 10 के सिक्कों की भी बहुलता है, जो बैंकों और व्यापारियों के साथ आम लोगों के भी परेशानी का कारण बन गए हैं। साथ में विवाद का भी। बैंक 10 के नोट लेने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि शाखा में 10 के नोट रखने के लिए जगह नहीं है। इसके विरोध में बैंक ऑफ बड़ौदा की कीडगंज शाखा समेत कई अन्य बैंकों में भी व्यापारी धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। व्यापारी सतीश केसरवानी का कहना है कि व्यापारियों के पास लाखों रुपये के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। अब 10 के नोट भी डंप होने लगे हैं। संतोष पनामा का कहना है कि आखिर वे 10 के नोट कहां ले जाएं। वहीं अग्रणी बैंक प्रबंधक रामजी का कहना है कि आरबीआई के निर्देश के अनुसार बैंक नोट लेने से मना नहीं कर सकते, लेकिन शाखाओं में नोट रखने के लिए स्थान सीमित है। ऐसे में कुछ दिक्कत है लेकिन नोट लिए जा रहे हैं।
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सिक्कों और छोटे मूल्य के नोट बैंकों में नहीं लिए जाने से व्यापार की शुरुआत करने वाले युवाओं की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। बिजनेस शुरू करने के लिए अब उन्हें सिक्काें तथा छोटे मूल्य के नोट के लिए अलग से बजट का इंतजाम करना होगा। जनरल मर्चेंट की दुकान खोलने वाले बेली के बालकृष्ण जायसवाल का कहना है कि बड़ी संख्या में सिक्के और 10 के नोट जमा हो गए हैं। ग्राहकों को एक-दो नोट देकर बोझ कुछ कम करने की कोशिश की जाती है, लेकिन उससे कहीं अधिक नोट आ जाते हैं। ऐसे में बैंकों के नोट नहीं लेने से उनके व्यापार बुरा असर पड़ रहा है।
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नकली सिक्कों को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है। एक रुपये के छोटे तथा 10 रुपये के एक खास तरह के सिक्के को नकली बताकर दुकानदार लेने से मना कर दे रहे हैं। जबकि, आरबीआई का स्पष्टीकरण आ चुका है कि हर तरह के सिक्के चलन में हैं। कोई सिक्का नकली नहीं है।