AU: अब खेल मनोविज्ञान भी पढ़ेंगे विद्यार्थी, ऑर्गेनाइजेशन, कंज्यूमर, फोरेंसिक साइकोलॉजी की भी होगी पढ़ाई
खेल से जुड़े कई संगठनों में नौकरी के लिए स्पोर्ट्स साइकोलॉजी पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वरीयता दी जाती है। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि किसी खिलाड़ी या टीम का मनोबल क्यों गिरता है। इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में मनोविज्ञान के छात्र अब स्पोर्ट्स साइकोलॉजी भी पढ़ेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत सत्र 2023-24 से शुरू होने जा रहे चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया है। नए पाठ्यक्रम का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम में पहले साल सर्टिफिकेट, दूसरे साल डिप्लोमा, तीसरे साल स्नातक की डिग्री और चौथे साल स्नातक ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। पहले साल तो छात्रों को बताया जाएगा कि मनोविज्ञान क्या हैं और इसे कैसे पढ़ें। इसके बाद दूसरे, तीसरे एवं चौथे साल में विद्यार्थियों को स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, मीडिया साइकोलॉजी, फोरेंसिक साइकोलॉजी, कंज्यूमर साइकोलॉजी, हेल्थ साइकोलॉजी, एनवायर्नमेंटल साइकोलॉजी आदि के बारे में पढ़ाया जाएगा।
खेल से जुड़े कई संगठनों में नौकरी के लिए स्पोर्ट्स साइकोलॉजी पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वरीयता दी जाती है। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि किसी खिलाड़ी या टीम का मनोबल क्यों गिरता है। इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। खेल के दौरान खिलाड़ी की मनोस्थिति क्या होती है। परिणाम की उसकी मनोस्थिति पर क्या असर पड़ता है। वहीं, कंज्यूमर साइकोलॉजी में ग्राहक के मनोविज्ञान के बारे में पढ़ाया जाएगा।
मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप आनंद ने बताया कि छात्रों को ऑर्गेनाइजेशन साइकोलॉजी के बारे में पढ़ाया जाएगा, जिसमें छात्रों को बताया जाएगा कि काम के दौरान किन कारणों से तनाव बढ़ता है। किन परिस्थितियों में कोई अपने काम से संतुष्ट या असंतुष्ट होता है। इसके साथ ही हेल्थ साइकोलॉजी में पढ़ाया जाएगा कि मनोविज्ञान का स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ता है। एनवायर्नमेंटल साइकोलॉजी में पर्यावरण और मनोविज्ञान के एक-दूसरे से संबंध का विश्लेषण किया जाएगा।
छात्रों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मनोविज्ञान में स्नातक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम को इस हिसाब से तैयार किया गया है, पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्रों में प्राथमिक रूप से विशेषज्ञता हासिल कर लें और विभिन्न क्षेत्रों में उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ें। सभी विषय ऐच्छिक होंगे और विद्यार्थी अलग-अलग सेमेस्टर में अपने मनपसंद विकल्प के रूप में इनकी पढ़ाई कर सकेंगे।