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गलत क्षैतिज आरक्षण दुरुस्त न करने पर सरकार को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:25 AM IST
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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
- फोटो : Demo Pic
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वर्ष 2013 की 41610 सिपाही भर्ती में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू कर ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को सामान्य वर्ग में नियुक्ति देने के मामले में पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभी तक हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है। इसे लेकर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि संशोधित परिणाम जारी करने के लिए उसने क्या प्रक्रिया अपनाई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में रवि कुमार शर्मा और अन्य की याचिका पर पांच नवंबर 2017 को अपने आदेश में आरक्षित वर्ग की महिलाओं को उनके वर्ग में नियुक्ति देने तथा इससे रिक्त हुई सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्त करने को कहा था। इस आदेश का पालन नहीं होने पर बृजेश कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति हर्ष कुमार सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि सामान्य वर्ग में क्षैतिज आरक्षण के तहत कुल 3550 महिलाओं का चयन होना था। मगर 1997 पद पर ही सामान्य वर्ग की महिलाएं मिलीं। शेष बचे पदों पर ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को नियुक्ति दे दी गई। जबकि नियम यह है कि जिस वर्ग की महिला अभ्यर्थी होगी उसको उसी वर्ग में क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। आरक्षित वर्ग की अभ्यर्थी को सामान्य में नियुक्ति नहीं दी जा सकती है।
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हाईकोर्ट ने सामान्य वर्ग में आरक्षित कोटे की महिलाओं की नियुक्ति रद्द करते हुए उनके वर्ग में नियुक्ति देने तथा सामान्य वर्ग की रिक्त हुई सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरने का आदेश दिया था मगर प्रदेश सरकार ने अभी तक आदेश का पालन कर संशोधित परिणाम जारी नहीं किया है। याचिका पर अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
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हाईकोर्ट ने इस मामले में रवि कुमार शर्मा और अन्य की याचिका पर पांच नवंबर 2017 को अपने आदेश में आरक्षित वर्ग की महिलाओं को उनके वर्ग में नियुक्ति देने तथा इससे रिक्त हुई सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्त करने को कहा था। इस आदेश का पालन नहीं होने पर बृजेश कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति हर्ष कुमार सुनवाई कर रहे हैं।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि सामान्य वर्ग में क्षैतिज आरक्षण के तहत कुल 3550 महिलाओं का चयन होना था। मगर 1997 पद पर ही सामान्य वर्ग की महिलाएं मिलीं। शेष बचे पदों पर ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को नियुक्ति दे दी गई। जबकि नियम यह है कि जिस वर्ग की महिला अभ्यर्थी होगी उसको उसी वर्ग में क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। आरक्षित वर्ग की अभ्यर्थी को सामान्य में नियुक्ति नहीं दी जा सकती है।
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हाईकोर्ट ने सामान्य वर्ग में आरक्षित कोटे की महिलाओं की नियुक्ति रद्द करते हुए उनके वर्ग में नियुक्ति देने तथा सामान्य वर्ग की रिक्त हुई सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरने का आदेश दिया था मगर प्रदेश सरकार ने अभी तक आदेश का पालन कर संशोधित परिणाम जारी नहीं किया है। याचिका पर अगली सुनवाई जनवरी में होगी।