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मोदी को काला झंडा दिखाने की मुराद नहीं हुई पूरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:42 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo photo
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इलाहाबाद रैली और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उनको काला झंडा दिखाने की आम आदमी पार्टी की मुराद पूरी नहीं हो सकी। इसकी इजाजत देने के लिए दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जिलाधिकारी द्वारा इस संबंध में प्रत्यावेदन पहले ही खारिज किया जा चुका है। याचिका आम आदमी पार्टी के सदस्य संजय सिंह और शिमला श्री की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि याचीगण प्रधानमंत्री और भाजपा की कई नीतियों और कार्यक्रमों से क्षुब्ध हैं।
उनका लोकतांत्रिक ढंग से विरोध करना चाहते हैं। उनके विरोध से किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं पैदा होगी। याची का कहना है कि गंगा सफाई, माघ मेला और कुं भ मेला के आयोजनों में धनराशि के अपव्यय पर केंद्र सरकार उदासीन है और जानबूझकर अनदेखी कर रही है। बीएसएफ, आईटीबीटी, सीआरपीएफ और असम राइफल्स में भर्तियों के दौरान कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भ्रष्टाचार किया गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय विधि पाठ्यक्र म की बीसीआई से मान्यता नहीं ली गई और देश के उच्च शिक्षण संस्थाओं में केंद्र सरकार के मंत्री दखल दे रहे हैं।
इन सब बातों से क्षुब्ध होकर वह काला झंडा दिखाकर शांति पूर्वक विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। याचीगण ने जिलाधिकारी इलाहाबाद को प्रत्यावेदन दिया था, जिस पर एलआईयू की रिपोर्ट भी मांगी गई मगर डीएम ने उनको झंडा दिखाने की इजाजत नहीं दी। कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या याचीगण ने डीएम के आदेश को चुनौती दी है। यदि ऐसा नहीं किया है तो याचिका पोषणीय नहीं है। याचिका में डीएम के आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी। इस आधार पर इसे खारिज कर दिया गया।
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उनका लोकतांत्रिक ढंग से विरोध करना चाहते हैं। उनके विरोध से किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं पैदा होगी। याची का कहना है कि गंगा सफाई, माघ मेला और कुं भ मेला के आयोजनों में धनराशि के अपव्यय पर केंद्र सरकार उदासीन है और जानबूझकर अनदेखी कर रही है। बीएसएफ, आईटीबीटी, सीआरपीएफ और असम राइफल्स में भर्तियों के दौरान कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भ्रष्टाचार किया गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय विधि पाठ्यक्र म की बीसीआई से मान्यता नहीं ली गई और देश के उच्च शिक्षण संस्थाओं में केंद्र सरकार के मंत्री दखल दे रहे हैं।
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इन सब बातों से क्षुब्ध होकर वह काला झंडा दिखाकर शांति पूर्वक विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। याचीगण ने जिलाधिकारी इलाहाबाद को प्रत्यावेदन दिया था, जिस पर एलआईयू की रिपोर्ट भी मांगी गई मगर डीएम ने उनको झंडा दिखाने की इजाजत नहीं दी। कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या याचीगण ने डीएम के आदेश को चुनौती दी है। यदि ऐसा नहीं किया है तो याचिका पोषणीय नहीं है। याचिका में डीएम के आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी। इस आधार पर इसे खारिज कर दिया गया।
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