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मांस लदा ट्रक पकड़ने वाले दरोगा का उत्पीड़न नहीं करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:49 AM IST
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supreme court
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हाईकोर्ट ने जनपद भदोही के दरोगा रमेश चौबे का उत्पीड़न नहीं करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके निलंबन, स्थानांतरण और संबद्धता के आदेश पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। रमेश चौबे ने याचिका दाखिल कर महाराष्ट्र के विधायक अबू आजमी के इशारे पर डीजीपी द्वारा उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि 27 जनवरी 2016 को थाना इंचार्ज गोपीगंज रमेश चौबे ने मांस से लदा ट्रक पकड़ा था। आरोप है कि उन पर ट्रक रिलीज करने का दबाव पड़ा, मगर उन्होंने पकड़े गए माल और ट्रक का चालान कर दिया। मांस का नमूना जांच के लिए भेजने के बाद सीजेएम के आदेश से शेष मांस नष्ट कर दिया गया। इसके बाद याची के विरुद्ध जांच बैठा दी गई और उसे लाइन हाजिर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट आने केबाद उसे निलंबित कर दिया गया।
याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई अबू आजमी के दबाव में की गई। याची ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने निलंबन पर रोक लगा दी। याची जब स्थगन आदेश की प्रति सक्षम अधिकारी को देने गया तो उसे बताया गया कि उसका स्थानांतरण मऊ करके कानपुर मुख्यालय से संबंद्ध कर दिया गया है। इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने स्थानांतरण और संबद्धता के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
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याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि 27 जनवरी 2016 को थाना इंचार्ज गोपीगंज रमेश चौबे ने मांस से लदा ट्रक पकड़ा था। आरोप है कि उन पर ट्रक रिलीज करने का दबाव पड़ा, मगर उन्होंने पकड़े गए माल और ट्रक का चालान कर दिया। मांस का नमूना जांच के लिए भेजने के बाद सीजेएम के आदेश से शेष मांस नष्ट कर दिया गया। इसके बाद याची के विरुद्ध जांच बैठा दी गई और उसे लाइन हाजिर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट आने केबाद उसे निलंबित कर दिया गया।
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याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई अबू आजमी के दबाव में की गई। याची ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने निलंबन पर रोक लगा दी। याची जब स्थगन आदेश की प्रति सक्षम अधिकारी को देने गया तो उसे बताया गया कि उसका स्थानांतरण मऊ करके कानपुर मुख्यालय से संबंद्ध कर दिया गया है। इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने स्थानांतरण और संबद्धता के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
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