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नोएडा अथॉरिटी को झटका : राजस्व रिकार्ड से हटेगा नोएडा अथॉरिटी का नाम, किसानों का होगा दर्ज

Thu, 05 Oct 2023 12:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 05 Oct 2023 12:17 PM IST
सार

कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के सलारपुर गांव की रद्द भूमि पर दर्ज नोएडा अथॉरिटी का नाम हटा कर राजस्व अभिलेखों में किसानों का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने राजेंद्र सिंह व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है.

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Noida Authority's name will be removed from revenue records, farmers will be recorded
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट से रद्द होने के बाद भी अपनी जमीन पर अपना नाम दर्ज न करवा पाने वाले किसानों को इलाहाबाद हाईकोर्ट बड़ी राहत दी है। हालांकि, अपने इस आदेश से हाईकोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को तगड़ा झटका भी दिया है। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के सलारपुर गांव की रद्द भूमि पर दर्ज नोएडा अथॉरिटी का नाम हटा कर राजस्व अभिलेखों में किसानों का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। 

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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने राजेंद्र सिंह व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है.याचियों की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गैर कानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया था।

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जिसके बाद राजस्व अभिलेखों में दर्ज नोएडा अथॉरिटी का नाम हटा कर किसानों का नाम दर्ज किया जाना चाहिए था, इस संबंध में किसानों ने गौतम बुद्ध नगर के अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) को प्रार्थना पत्र देकर राजस्व रिकॉर्ड से नोएडा का नाम हटाने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने चार मार्च को किसानों की अर्जी को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि याची सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई अपील में पक्षकार नही थे, इसलिए वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ पाने के अधिकारी नही हैं।

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याचियों के अधिवक्ता ने बताया कि याचियों की उक्त भूमि का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 की धारा 17(1)(4) के तहत किया गया था। किसानों ने 11 सितंबर 2008 और 30 सितंबर 2009 की भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद किसानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर 2008 और 30 सितंबर 2009 की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रक्रिया का पालन करते हुए दोबारा भूमि अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता दी थी। लेकिन दुबारा कोई अधिसूचना जारी नही हुई, इसलिए राजस्व अभिलेखों से नोएडा अथॉरिटी का नाम हटा कर पुनः किसानों का नाम दर्ज किया जाना चाहिए। ।

हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते गौतम बुद्ध नगर प्रशासन को राजस्व अभिलेखों से नोएडा का नाम हटाने और किसानों की भूमि पर उनका नाम चार सप्ताह चढ़ाने का आदेश दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए नोएडा और जिला प्रशासन भूमि अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है। फिलहाल जब तक भूमि अधिग्रह की कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती रही तब तक राजस्व अभिलेखों में किसानों का नाम दर्ज रहेगा।

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