UP : यमुना एक्सप्रेसवे भूमि घोटाले में याचियों को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने खारिज कीं याचिकाएं
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति वैज मियां की खंडपीठ ने प्रमोद चंद्र गुप्ता, सोनाली गुप्ता व अन्य, गौरव कुमार की याचिका को खारिज और सीबीआई की ओर से दाखिल स्थानांतरण अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है।
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यमुना एक्सप्रेसवे भूमि घोटाले के मामले में याचियों को राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने याचियों की प्राथमिकी रद्द करने की मांग को अस्वीकार करते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने मामले की सुनवाई मेरठ से गाजियाबाद सीबीआई की विशेष कोर्ट भ्रष्टाचार निरोधक में करने की सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया है और सुनवाई दिन-प्रतिदिन करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को मामले की जांच जल्दी पूरी करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति वैज मियां की खंडपीठ ने प्रमोद चंद्र गुप्ता, सोनाली गुप्ता व अन्य, गौरव कुमार की याचिका को खारिज और सीबीआई की ओर से दाखिल स्थानांतरण अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कुल सात बिंदुओं पर अपने आदेश पारित किए हैं। मामले में कुल छह याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई चल रही थी। इनमें से सीबीआई ने मामले की सुनवाई को मेरठ सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक से सीबीआई विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निरोधक गाजियाबाद में स्थानांतरित करने के लिए दाखिल कर रखी थी। उसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
जबकि पांच याचिकाओं को मेरिट के आधार पर खारिज कर दिया। मामला यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से जुड़ा हुआ है। अथॉरिटी ने मथुरा के सात गांवों में 57.1549 हेक्टेयर भूमि खरीदी। उसके भुगतान में गड़बड़ी की गई। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने अपने परिचितों को अत्यधिक दाम दिए। इसमें कुल 85.49 करोड़ मुआवजा दिया गया। मामले में अथॉरिटी के सीईओ ने जांच की तो गड़बड़ी सामने आ गई। मामले में 21 नामजद के साथ बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। बाद में यूपी सरकार ने मामले को जांच के लिए सीबीआई को रेफर कर दिया गया।
प्रवर्तन निदेशालय को भी जांच की जिम्मेदारी दी गई। दोनों जांच एजेंसियों ने अलग से प्राथमिकी दर्ज की। याचियों ने दोनों जांच एजेंसियों की प्राथमिकी को चुनौती दी और उसे रद्द करने की मांग की। सीबीआई के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश और संजय सिंह ने बताया कि मामले में कोई अलग से प्राथमिकी नहीं दर्ज की गई थी। यूपी पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की थी सीबीआई ने उसी प्राथमिकी को अपनी शिकायत रिपोर्ट बनाया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचियों की ओर से दाखिल याचिकाओं को निरस्त कर दिया और सीबीआई की स्थानांतरण अर्जी को स्वीकार कर लिया।