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यूपी बोर्ड : नहीं हुई पुनर्परीक्षा, रिकार्ड समय में रिजल्ट, पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं पर लगे क्यूआर कोड

Tue, 25 Apr 2023 11:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 25 Apr 2023 11:05 PM IST
सार

यूपी बोर्ड ने इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में कई नए और अहम प्रयोग किए और इसका असर भी देखने को मिला। तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ, जब यूपी बोर्ड का पुनर्परीक्षा नहीं करानी पड़ी और बोर्ड के 100 वर्षां के इतिहास में रिजल्ट रिकार्ड समय में जारी कर दिया गया।

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No re-examination, result in record time, for the first time QR code on answer sheets
यूपी बोर्ड मुख्यालय। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी बोर्ड ने इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में कई नए और अहम प्रयोग किए और इसका असर भी देखने को मिला। तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ, जब यूपी बोर्ड का पुनर्परीक्षा नहीं करानी पड़ी और बोर्ड के 100 वर्षां के इतिहास में रिजल्ट रिकार्ड समय में जारी कर दिया गया।

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यूपी बोर्ड की परीक्षा 16 फरवरी से चार मार्च तक आयोजित की गई थी। इसके बाद पुनर्मूल्यांकन 14 दिनों में पूरा कर लिया गया और बोर्ड के 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी कर दिया गया। इससे पूर्व रिजल्ट कभी भी इतनी जल्दी जारी नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि यूपी बोर्ड की से लागू तमाम नई व्यवस्थाओं के कारण रिजल्ट जारी करने का रिकार्ड बन सका।

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यूपी बोर्ड के निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि 30 वर्षों के दौरान पहली बार ऐसा हुआ, जब यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान न तो पेपर लीक हुआ और न ही गलत प्रश्नपत्र खोले जाने की कोई घटना हुई। नतीजा रहा कि यूपी बोर्ड को पुनर्परीक्षा नहीं करानी पड़ी और बोर्ड ने वक्त से पहले परिणाम जारी कर दिया।

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वर्ष 2023 की बोर्ड परीक्षा में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए पहली बार उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों के अनुसार प्रश्नपत्रों की चार लेयर में टैंपर एविडेंट लिफाफों में पैकेजिंग कराई गई। टैंपर एविडेंट लिफाफों में पैकेजिंग के कारण प्रश्नपत्रों के वायरल होने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगा। ऐसे में पुनर्परीक्षा कराने की नौबत ही नहीं आई।

साथ ही परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के मद्देनजर पहली बार प्रधानाचार्य कक्ष से अलग एक सुरक्षित कक्ष में स्ट्रांग रूम की व्यवस्था की गई। सबसे महत्वपूर्ण यह कि उत्तर पुस्तिकाओं की शुचिता एवं सुरक्षा के मद्देनजर पहली बार क्यूआर कोड और माध्यमिक शिक्षा परिषद का लोगो लगाया गया। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जनपदों में सिलाईयुक्त उत्तर पुस्तिकाएं प्रेषित की गईं। बोर्ड के इस कदम से उत्तरपुस्तिकाओं में हेरफेर की आशंका भी बहुत कम रह गई।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को शामिल करने से सुधरा हाईस्कूल का रिजल्ट

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का समावेश करते हुए इस वर्ष प्रश्नपत्रों के प्रारूप में परिवर्तन किया गया। 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की परीक्षा ओएमआर शीट पर कराई गई। माना जा रहा है कि प्रश्नपत्रों के प्रारूप में परिवर्तन के कारण ही इस वर्ष हाईस्कूल के रिजल्ट में सुधार देखने को मिला और परीक्षार्थियों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 1.60 फीसदी की वृद्धि हुई।

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