फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   No inquiry into the tampering of revenue records can be conducted without a complaint from the custodian of the documents: High Court.

दस्तावेज के संरक्षक की शिकायत के बिना राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ की नहीं हो सकती जांच : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:31 AM IST
विज्ञापन
No inquiry into the tampering of revenue records can be conducted without a complaint from the custodian of the documents: High Court.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ की जांच उसके आधिकारिक संरक्षक की शिकायत पर की जा सकती है। किसी तीसरे पक्षकार की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच उचित नहीं।
विज्ञापन

इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ के आरोपी हाथरस निवासी हनुमान प्रसाद पोद्दार के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है।
विज्ञापन

मामला हाथरस के हाथरस गेट थाना क्षेत्र का है। याची ने 2009 में खाता संख्या-130 का एक हिस्सा बसपा के पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी रीतू उपाध्याय को विक्रय किया था। बाद में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी भूमि पर बाउंड्री बनाकर उसे अलग किया। 2013 में यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत भूमि को आबादी घोषित करा लिया। इसके बाद संपत्ति को लेकर दीवानी विवाद शुरू हुआ और मामला न्यायालय में लंबित है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसी बीच चार जून को पूर्व एमएलसी मुकुल उपध्याय ने राजस्व नक्शे में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें भूमि विक्रेता हनुमान प्रसाद पोद्दार के अलावा नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा, पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल, उनके बेटे रजत अग्रवाल समेत आठ लोगों को नामजद व अन्य राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का शामिल किया गया है।
एफआईआर को चुनौती देते हुए याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब खरीदार 2009 में भूमि का कब्जा लेकर 2013 में उसे आबादी घोषित करा चुका है, तब अब राजस्व नक्शे में छेड़छाड़ का आरोप नहीं लगा सकता। यदि किसी सरकारी अभिलेख में वास्तव में छेड़छाड़ हुई है तो इसकी शिकायत संबंधित अभिलेख के आधिकारिक संरक्षक को करनी चाहिए थी।

कोर्ट ने कहा कि खरीदार इतने वर्षों बाद राजस्व नक्शे में छेड़छाड़ का दावा नहीं कर सकता। ऐसे दस्तावेज में कथित हेरफेर की जांच उसके आधिकारिक संरक्षक की शिकायत पर ही शुरू होनी चाहिए। इस मामले में संरक्षक की ओर से कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है, इसलिए एफआईआर पर आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed