{"_id":"603f7a7bac0e4a4eb8778ad2","slug":"no-education-authority-to-be-made-with-courts-permition-says-allahabad-hc","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट की अनुमति के बिना शिक्षा अधिकरण गठित करने पर रोक: इलाहाबाद हाइकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट की अनुमति के बिना शिक्षा अधिकरण गठित करने पर रोक: इलाहाबाद हाइकोर्ट
Wed, 03 Mar 2021 05:30 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, इलाहाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, इलाहाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 03 Mar 2021 05:30 PM IST
विज्ञापन
Allahabad High Court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि शिक्षा सेवा अधिकरण का गठन बिना हाइकोर्ट के अनुमति के नहीं किया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने अधिकरण के गठन की विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करते हुए कहा है कि सरकार गठन की प्रक्रिया जारी रख सकती है।
विज्ञापन
इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकरण के मुद्दे पर हड़ताल कर रहे प्रयागराज और लखनऊ के वकीलों से काम पर वापस लौटने की अपील की है। कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वह शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टाफ के विचाराधीन मुकदमों के निस्तारण को गति देने के लिए अतिरिक्त पीठें बनाएं।
विज्ञापन
कोर्ट ने राज्य सरकार को बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित कर शिकायतों के निवारण का प्रयास करने का निर्देश दिया है। जीएसटी अधिकरण के मुद्दे पर लखनऊ पीठ ने सुनवाई के कारण कोई आदेश जारी नहीं किया है।
विज्ञापन
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने स्वतः कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोरोना लॉकडाउन में भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चला, लेकिन शिक्षा सेवा अधिकरण की पीठ स्थापित करने के मुद्दे को लेकर देश के सबसे बड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं। जिससे न्यायिक कार्य निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है।
कोर्ट ने शैक्षिक और गैर शैक्षिक स्टाफ के पिछले 20 साल के मुकदमों का चार्ट देखा, जिसके तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज में सेवा के 188632 केस दाखिल हुए जिसमें से 33290 केस विचाराधीन हैं। इसी प्रकार लखनऊ पीठ में 55913 केस दाखिल हुए और 15003 केस विचाराधीन हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुल प्रधान पीठ में 33290 और लखनऊ खण्डपीठ में 15003 केस विचाराधीन हैं। अधिकरण कानून में लखनऊ में मुख्यालय और प्रयागराज में पीठ के गठन की व्यवस्था है। चेयरमैन को बैठने के दिन तय करने का विवेकाधिकार दिया गया है।
इसके गठन को लेकर इलाहाबाद व लखनऊ के बार एसोसिएशन को शिकायत है। जिसको लेकर वे न्यायिक कार्य से विरत हैं और हाईकोर्ट के मुकदमों के निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है।
यह कहा गया कि अधिकरण के गठित होने से त्वरित निस्तारण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। शिक्षण संस्थाओं के अधिक मुदमे प्रयागराज में हैं। अधिक पीठें बैठाकर निस्तारण मे तेजी लाई जा सकती है। न्यायिक कार्य बहिष्कार से कोर्ट के कीमती समय की बर्बादी हो रही है।
इसी तरह 2019 में भी हड़ताल हुई थी। मुकदमों के निस्तारण में वकीलों की सहभागिता जरूरी है। इसलिए न्यायिक कार्य चालू रखने के लिए कोर्ट ने यह निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद लखनऊ में अतिरिक्त पीठें बैठाकर मुकदमों के निस्तारण मे तेजी लाएंगे और सरकार को बार एसोसिएशन से बात करनी होगी।