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कोरोना नहीं है फिर भी तनाव है लोगों में
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कोरोना ने दो महीने में भले ही अभी तक 76 लोगों को निशाना बनाया हो, लेकिन उसके इतर शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, टीबी, अस्थमा, दिल, दिमाग के हजारों की संख्या में मरीज परेशान हैं और दर-दर भटक रहे हैं। चिकित्सकीय सलाह न मिलने और उनकी जांच न होने से ऐसे मरीजों के जीवन पर संकट मंडराने लगा है। कई लोग घर पर तो कई अस्पताल पहुंचकर दम तोड़ रहे हैं।
चिकित्सकीय समूहों के एक अनुमान के मुताबिक जिले में रोजाना 50 हजार से अधिक मरीज ओपीडी में दिखाने पहुंचे हैं। इसमें तीस फीसदी मरीज एसआरएन, बेली, कॉल्विन, डफरिन, टीबी, चिल्ड्र्ेन, जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचते हैं तो 70 फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में उपचार को पहुंचते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. युगांतर पांडेय ने बताया कि पहले तो ओपीडी को बिल्कुल ही बंद रखा गया। अब नई गाइडलाइन जारी हुई है तो कहा जा रहा है कि दो साल तक के बच्चों को देखें, उसके अधिक उम्र के बच्चों को न देखें।
सरकार का ये तर्क समझ से परे है। उनका कहना है कि उनकी क्लीनिक की ओपीडी में सामान्य दिनों में 100 से अधिक बच्चे उपचार को आते थे। अब बिल्कुल ही बंद है। फोन से सलाह दी जा रही है। उधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल का कहना है कि डायबिटिक, ब्लडप्रेशर के मरीजों की जांच न होने से उनका सही उपचार नहीं हो पा रहा है। उनके पास कई ऐसे मरीज हैं, जिनका ऑपरेशन रुका हुआ है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी प्रो. एसपीएस चौहान ने बताया कि उनकी ओपीडी में दो सौ से अधिक मरीज आते हैं। अब वे नहीं आ पा रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है। ब्लडप्रेशर, शुगर का सही उपचार न होने से दिल, दिमाग पर ज्यादा खतरा खड़ा हो गया है। दो महीने में कई ऐसे मरीज रहे, जिनको उपचार न मिलने से जान गंवानी पड़ी।
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चिकित्सकीय समूहों के एक अनुमान के मुताबिक जिले में रोजाना 50 हजार से अधिक मरीज ओपीडी में दिखाने पहुंचे हैं। इसमें तीस फीसदी मरीज एसआरएन, बेली, कॉल्विन, डफरिन, टीबी, चिल्ड्र्ेन, जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचते हैं तो 70 फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में उपचार को पहुंचते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. युगांतर पांडेय ने बताया कि पहले तो ओपीडी को बिल्कुल ही बंद रखा गया। अब नई गाइडलाइन जारी हुई है तो कहा जा रहा है कि दो साल तक के बच्चों को देखें, उसके अधिक उम्र के बच्चों को न देखें।
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सरकार का ये तर्क समझ से परे है। उनका कहना है कि उनकी क्लीनिक की ओपीडी में सामान्य दिनों में 100 से अधिक बच्चे उपचार को आते थे। अब बिल्कुल ही बंद है। फोन से सलाह दी जा रही है। उधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल का कहना है कि डायबिटिक, ब्लडप्रेशर के मरीजों की जांच न होने से उनका सही उपचार नहीं हो पा रहा है। उनके पास कई ऐसे मरीज हैं, जिनका ऑपरेशन रुका हुआ है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी प्रो. एसपीएस चौहान ने बताया कि उनकी ओपीडी में दो सौ से अधिक मरीज आते हैं। अब वे नहीं आ पा रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है। ब्लडप्रेशर, शुगर का सही उपचार न होने से दिल, दिमाग पर ज्यादा खतरा खड़ा हो गया है। दो महीने में कई ऐसे मरीज रहे, जिनको उपचार न मिलने से जान गंवानी पड़ी।
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