पीसीएस मेंस-2020 के आवेदन को लेकर हुई थी शिकायत, आयोग ने मानी गलती
- गलती से पूछा था माता-पिता का आपराधिक इतिहास
विस्तार
पीसीएस-2020 की मुख्य परीक्षा के आवेदन में माता-पिता के आपराधिक इतिहास के बारे में भी पूछा गया था। अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शिकायतकर्ता को भेजे गए जवाब में मान लिया है कि ऐसा गलती से हुआ था और अभ्यर्थियों से शिकायत प्राप्त होने के बाद इस गलती को ठीक कर दिया गया था।
पीसीएस मेंस-2020 के आवेदन के दौरान माता-पिता का आपराधिक इतिहास पूछे जाने पर एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर ने आयोग को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। नूतन ठाकुर के पुत्र ने भी पीसीएस मेंस के लिए आवेदन पत्र भरा था। इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए नूतन ठाकुर ने कहा था कि आवेदन में मांगी गई यह जानकारी अनावश्यक एवं औचित्यहीन है। इससे अभ्यर्थी का कोई लेनादेना नहीं होता है। यह अभ्यर्थी को अनावश्यक रूप से परेशानी की स्थिति में डालता है।
प्रार्थना पत्र के जवाब में अब आयोग के अनुभाग अधिकारी/जनसूचना अधिकारी राकेशधर द्विवेदी ने नूतन ठाकुर को भेजे गए जवाब में कहा है कि परीक्षा-2020 के ऑनलाइन आवेदन के दौरान तकनीकी त्रुटिवश माता-पिता के आपराधिक इतिहास का कॉलम स्क्रीन पर प्रदर्शित हो रहा था। हालांकि अभ्यर्थियों की ओर से भरे गए आवेदनपत्र की कॉपी में यह कॉलम प्रिंट नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों से शिकायत प्राप्त होने पर उस त्रुटि को ठीक कर दिया गया था।
पीसीएस-2017 की कॉपी दिखाने से इनकार
पीसीएस-2017 के एक अभ्यर्थी ने कॉपी दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में जनसूचना अधिकारी के तहत आवेदन किया था, लेकिन आयोग ने कॉपी दिखाने से इनकार कर दिया। अभ्यर्थी आलोक कुमार सिंह ने अक्तूबर-2020 में आरटीआई के माध्यम से कॉपी देखने के लिए आवेदन किया था। आयोग ने आरटीआई के तहत 28 जनवरी को जवाब भेजा, जो आलोक को दो फरवरी को मिला। इसमें लिखा हुआ है कि पीसीएस-2017 की उत्तर पुस्तिकाओं को संरक्षित रखने समयावधि बीत चुकी है।
इस वजह से उत्तर पुस्तिकाओं को अवलोकन कराया जाना संभव नहीं है। आलोक का कहना है कि आयोग ने पीसीएस-2017 की मार्कशीट फरवरी 2020 में जारी की थी। इसके बाद आरटीआई के माध्यम से कॉपी दिखाए जाने का प्रावधान है। कोविड के कारण उस वक्त आवेदन नहीं कर सके। साल भर भी नहीं बीता और आयोग ने कॉपी दिखाने से इनकार कर दिया, जबकि पहले तीन वर्ष तक कॉपी दिखाई जाती थी।