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नए शोध करना चिकित्सकों का दायित्वः केशरीनाथ
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New research should be done to treat infection like corona virus- Kesharinath
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। हमारी भारतीय चिकित्सा पद्धति प्रचीनतम है। फिर भी गंभीर मरीजों को भटकना पड़ रहा है। कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के इलाज के लिए चिकित्सकों का दायित्व है कि वह नए शोध करें फिर पीड़ितों का उपचार कर उन्हें स्वस्थ करें।
यह विचार पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वह बृहस्पतिवार को एएमए कंवेंशन हाल में केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि प्रकृति से तालमेल न रख पाने के कारण लोग अनेक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हमें प्राकृतिक तरीकों से उपचार की पद्धति अपनानी होगी।
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र (यूनानी) के संयोजकत्व में आयोजित यूनानी औषधि नियंत्रक, उद्योग कर्मचारी एवं अन्य के प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनानी विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. मो. तारिक ने कहा कि आयुष चिटिक्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। डॉ. दीनानाथ तिवारी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि खानपान और जीवनशैली सुधारने की आवश्यकता है।
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डॉ.अयूब खान ने सामान्य ही नहीं गंभीर रोगों में यूनानी दवाओं के प्रभाव की जानकारी दी। डॉ. विजयभान सिंह आदि ने दवाओं विषयक अनुभव साझा किए। क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने नसों के खिंचाव और उदर रोगों में दवाओं के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. शांति चौधरी ने किया।
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यह विचार पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वह बृहस्पतिवार को एएमए कंवेंशन हाल में केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि प्रकृति से तालमेल न रख पाने के कारण लोग अनेक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हमें प्राकृतिक तरीकों से उपचार की पद्धति अपनानी होगी।
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क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र (यूनानी) के संयोजकत्व में आयोजित यूनानी औषधि नियंत्रक, उद्योग कर्मचारी एवं अन्य के प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनानी विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. मो. तारिक ने कहा कि आयुष चिटिक्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। डॉ. दीनानाथ तिवारी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि खानपान और जीवनशैली सुधारने की आवश्यकता है।
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डॉ.अयूब खान ने सामान्य ही नहीं गंभीर रोगों में यूनानी दवाओं के प्रभाव की जानकारी दी। डॉ. विजयभान सिंह आदि ने दवाओं विषयक अनुभव साझा किए। क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने नसों के खिंचाव और उदर रोगों में दवाओं के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. शांति चौधरी ने किया।