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लर्निंग हब बनेंगे सीबीएसई स्कूल
Wed, 17 Apr 2019 11:51 PM IST
विनोद सिंह
News Desk, Amarujala, Prayagraj
News Desk, Amarujala, Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 17 Apr 2019 11:51 PM IST
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CBSE
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने सभी स्कूलों को आपस में जोड़ने की तैयारी की है। बोर्ड की ओर से स्कूलों को कोलाबरेटिव लर्निंग हब (सीएलएच) बनाया जा रहा है। सीएलएच के तहत देशभर के सीबीएसई से संबद्घ स्कूलों को आपस में जोड़ा जाएगा। यह स्कूल अपने संसाधनों को अन्य स्कूलों के साथ साझा करेंगे। लर्निंग हब एक जुलाई से काम करना शुरू कर देंगे। सीएलएच के तहत देशभर के स्कूलों को लर्निंग हब में बांटा जाएगा। एक लर्निंग हब में पांच या उससे अधिक स्कूल शामिल होंगे।
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एक-दूसरे का सहयोग करेंगे स्कूल, छात्रों को मिलेगा मौका
सीबीएसई की ओर से हो रही इस अनोख्री पहल के बाद एक लर्निंग हब के अंदर आने वाले स्कूल अलग-अलग गतिविधियों में एक-दूसरे का सहयोग कर सकेंगे। बोर्ड की ओर से कहा गया है कि स्कूल वाले क्षमता निर्माण में एक-दूसरे की मदद करेंगे। स्कूल आपस में मिलकर संयुक्त तरीके से कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। स्कूलों से आपस में शैक्षिक सहयोग के कार्यक्रम भी होंगे। स्कूलों के आपस में सहयोग से छात्रों को सीखने के लिए अधिक मौके मिलेंगे।
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गांवों को गोद लेंगे स्कूल
सभी लर्निंग हब अपने आसपास में स्थित औद्योगिक इकाइयों, कारखानों, प्रशासकीय मुख्यालयों, सुरक्षा सेवाओं, उच्च शिक्षा के संस्थानों और बिजनेस हाउस से भी जुड़ेंगे। इसके जरिए छात्र उनसे कुछ सीख सकें और जीवन व समाज के बारे में गहरी जानकारी हासिल हो सके। लर्निंग हब को कल्याणकारी गतिविधियों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए गांव, मोहल्ला, वार्ड को गोद लेकर उनको विकसित करेंगे।
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लर्निंग हब से स्कूलों में बढ़ेगा सहयोग
-लर्निग हब में शामिल स्कूल आपस में खेलकूद की सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, सभागारों को भी आपस में साझा करेंगे।
सीबीएसई ने कहा है कि लर्निंग हब में शामिल स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के प्रशिक्षध के लिए आपस में खेलकूद प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, विज्ञान प्रदर्शनी और क्विज का आयोजन किया जाएगा।
-हब में शामिल स्कूल छात्रों केलिए कुछ अहम मामलों सुरक्षा, सलामती, ऊर्जा और जल संरक्षण, पर्यावरण, डिजिटल नवाचार और मूल्यों एवं नेतृत्व कौशल सेमिनारों के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
-आधारभूत ढांचा और शिक्षकों की कमी की वजह से किसी स्कूल में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। किसी स्कूल में अगर शिक्षक की कमी है तो उसकी पूर्ति दूसरे स्कूल से कर सकेंगे।