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National Post Day: 1911 को दुनिया में सर्वप्रथम यूपी के इस शहर से आरंभ हुई हवाई डाक सेवा, पढ़ें रोचक किस्से

Tue, 10 Oct 2023 06:13 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 10 Oct 2023 06:13 PM IST
सार

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि रेल सेवा के आरंभ होने के बाद प्रयागराज और कानपुर के बीच अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम बार रेलवे सार्टिंग सेक्शन की स्थापना 1 मई 1864 को की गई, जो कि कालांतर में रेलवे डाक सेवा में तब्दील हो गया। 

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National Post Day First air mail service in world started in Prayagraj in 1911
National Post Day - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज भले ही ई-मेल और सोशल मीडिया का जमाना हो पर पत्रों और पार्सल का चलन अभी भी कम नहीं हुआ है। वैयक्तिक पत्रों के बजाय सरकारी व कॉरपोरेट डाक एवं ई-कॉमर्स द्वारा मंगाए जाने वाले पार्सल उत्पादों का दायरा बढ़ा है। राष्ट्रीय डाक दिवस के शुभारंभ पर प्रयागराज परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि प्रयागराज से ही प्रथम वायु, रेल व अन्य डाक सेवायें आरंभ हुईं। प्रयागराज को डाक सेवाओं की शुरुआत के लिए भी जाना जाता है।

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पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण ब्रिटिश शासन काल से ही अंग्रेजों ने प्रयागराज में डाक सेवाओं की प्रमुखता पर जोर दिया। हवाई डाक सेवा दुनिया में सर्वप्रथम 18 फरवरी, 1911 को प्रयागराज में आरंभ हुई। करीब साढे़ छह हजार पत्रों का थैला लेकर यह विमान प्रयागराज के पोलो ग्राउंड से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नैनी रेलवे स्टेशन के पास के मैदान में उतरा था। फिर वहां से उन डाक को अन्य परिवहन साधनों से आगे भेजा गया। आंकड़ों के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया, जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी। 
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पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि मेल बैग पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ लिखा था। प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। करीब 13 मिनट की इस हवाई यात्रा ने इतिहास रच दिया। इसके लिए दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों  के लिए लोगों ने पत्र लिखे थे, जिनमें से एक पत्र जवाहर लाल नेहरू के नाम उनके पिता मोती लाल नेहरू का भी था। कई ब्रिटिश अधिकारियों ने जार्ज पंचम को भी पत्र लिखे थे। उस एक दिन के लिए अलग से डाक मोहर भी बनवाई गई थी।

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रेलवे डाक सेवा का उद्भव भी प्रयागराज में ही हुआ माना जाता है। पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि रेल सेवा के आरंभ होने के बाद प्रयागराज और कानपुर के बीच अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम बार रेलवे सार्टिंग सेक्शन की स्थापना 1 मई 1864 को की गई, जो कि कालांतर में रेलवे डाक सेवा में तब्दील हो गया। 

प्रयागराज और कानपुर के बीच घोड़ा गाड़ी द्वारा आरंभ की गई डाक सेवा
भारतीय डाक पर एक शोधपूर्ण पुस्तक "इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस इयर्ज" लिख चुके वरिष्ठ लेखक एवं पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि 6 मई 1840 को ब्रिटेन में विश्व के प्रथम डाक टिकट जारी होने के अगले वर्ष 1841 में प्रयागराज और कानपुर के मध्य घोड़ा गाड़ी द्वारा डाक सेवा आरंभ की गई। प्रयागराज के एक धनी व्यापारी लाला ठंठीमल, जिनका व्यवसाय कानपुर तक विस्तृत था को इस घोड़ा गाड़ी डाक सेवा को आरंभ करने का श्रेय दिया जाता है, जिन पर अंग्रेजों ने भी अपना भरोसा दिखाया। जीटी रोड बनने के बाद उसके रास्ते भी पालकी और घोड़ा गाड़ी से डाक आती थी, जिसमें एक घोड़ा 7 किलोमीटर का सफर तय करता था। आधा तोला वजन का एक पैसा किराया तुरन्त भुगतान करना होता था। प्रयागराज से बिठूर तक डाक का आवागमन गंगा नदी के रास्ते से होता था।  

प्रयागराज के बाद कलकत्ता से कानपुर के बीच डाक सेवा हुई आरंभ
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक हरकारे जंगल से होकर गुजरते थे इसलिए सुरक्षा के लिहाज से कमर में घंटी और हाथ में भाला लिए रहते थे। सन् 1850 में लाला ठंठीमल ने कुछ अंग्रेजों के साथ मिलकर ‘इनलैण्ड ट्रांजिट कम्पनी’ की स्थापना की और प्रयागराज के बाद कलकत्ता से कानपुर के मध्य घोड़ा गाड़ी डाक व्यवस्थित रूप से आरंभ किया। अगले वर्षों में इसका विस्तार मेरठ, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, बनारस इत्यादि प्रमुख शहरों में भी किया गया। 

प्रयागराज की अवस्थिति इन शहरों के मध्य में होने के कारण डाक सेवाओं के विस्तार के लिहाज से इसका महत्वपूर्ण स्थान था। इस प्रकार लाला ठंठीमल को भारत में डाक व्यवस्था में प्रथम कम्पनी स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। 1854 में डाक सेवाओं के एकीकृत विभाग में तब्दील होने पर इनलैण्ड ट्रांजिट कम्पनी’ का विलय भी इसमें कर दिया गया।स्था में प्रथम कम्पनी स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। 1854 में डाक सेवाओं के एकीकृत विभाग में तब्दील होने पर इनलैण्ड ट्रांजिट कम्पनी’ का विलय भी इसमें कर दिया गया।

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