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प्रयागराज के झलवा में 25 एकड़ में बनेगा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय

Thu, 30 Jul 2020 12:32 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 30 Jul 2020 12:32 AM IST
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National Law University to be built on 25 acres in Jhalwa, Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj
प्रदेश सरकार संगम नगरी में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी। सरकार की ओर से झलवा में 25 एकड़ जमीन पर विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। लखनऊ के राममनोहर लोहिया विधि विवि जो 40 एकड़ में बना है, उसके बाद यह विवि सबसे बड़े परिसर में होगा। इस विवि की स्थापना नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बंगलुरु की तर्ज पर की जाएगी। प्रदेश सरकार के न्याय विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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विधि विवि खोलने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ेंगे

विधि विवि खोले जाने से प्रयागराज एवं उसके आसपास के छात्रों के लिए कानून की पढ़ाई के रास्ते खुलेंगे। इसमें डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्त्रस्म चलाए जाएंगे। इसके साथ न्यायिक व अन्य विधि सेवाएं, विधि निर्माण, विधि सुधार के क्षेत्र में छात्रों को शोध की सुविधा होगी। व्यावसायिक शिक्षा और न्यायिक पदाधिकारियों व अन्य व्यक्तियों को विधि क्षेत्र में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी होगी।
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कानून के जानकार होंगे पदाधिकारी 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष होंगे, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होंगे। कुलाधिपति ही विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति करेगा। विश्वविद्यालय में महापरिषद, कार्य परिषद, शैक्षिक परिषद और वित्तीय समिति का गठन होगा। महापरिषद को विश्वविद्यालय के बारे में फैसला लेने का सर्वोच्च अधिकार होगा।
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16 साल पहले हुई थी घोषणा

विधि विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा 16 साल पहले आठ जनवरी 2003 को हो गई थी। शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित पब्लिक लाइब्रेरी में प्रदेश विधानसभा की विशेष बैठक आयोजित की गई थी। उस समय प्रदेश में भाजपा और बसपा की संयुक्त सरकार थी। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती मुख्यमंत्री थीं। मायावती ने ही विधि विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी।


पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे केशरी नाथ त्रिपाठी तब प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष थे। उनकी पहल पर बुलाई गई बैठक में तत्कालीन राज्यपाल स्व. विष्णुकांत शास्त्री, मुख्यमंत्री मायावती, केशरी नाथ त्रिपाठी, विपक्ष के नेता प्रमोद तिवारी ने विचार रखे थे। सपा ने इसका बहिष्कार किया था। इस घोषणा के सात माह बाद 29 अगस्त 2003 को भाजपा के समर्थन वापस लेने की वजह से मायावती की सरकार जाने के साथ घोषणा खटाई में पड़ गई थी। 
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