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मोरारी बापू की रामकथा में ज्ञान की गहरी जड़ों से जुड़ेगा राष्ट्रप्रेम

Sun, 16 Feb 2020 01:23 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 16 Feb 2020 01:23 AM IST
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Nation love to be linked with deep roots of knowledge in Morari Bapu's Ram Katha
मोरारी बापू
जगविख्यात मानस कथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू की कथा के संत-भक्त निवास आकार लेने लगे हैं। मुख्य व्यासपीठ का निर्माण भी अंतिम दौर में पहुंच गया है। जर्मन हैंडर स्टाइल पर बनने वाले इस भव्य पंडाल के अलावा हर कॉटेज की दीवारों पर तरह-तरह की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चित्रकृतियां देश-दुनिया से आने वाले रामकथा प्रेमियों को लुभाएंगी। ज्ञान की गहरी जड़ों के रूप में मानस अक्षयवट की कथा पंडाल के मुख्य द्वार पर राष्टध्वज फहराता रहेगा। कथा 29 फरवरी से आरंभ होगी।
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संत मोरारी बापू की ‘मानस अक्षयवट’ राम कथा के पंडाल का निर्माण जर्मन तकनीक पर किया जा रहा है। भव्य मुख्य द्वार पर राष्ट्रीय ध्वज लहराता नजर आएगा। बाहर से आने वाले रामकथा प्रेमियों के लिए वातानुकूलित कॉटेज बनाए जा रहे हैं। मौसम की अनुकूलता के अनुसार तैयार किए जा रहे कॉटेज के प्रत्येक सर्व सुविधा से युक्त होंगे।
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हर कॉटेज के साथ प्रसाधन की अलग -अलग व्यवस्था होगी। दीवारों पर वाल पेंटिंग कराई जाएगी। चित्र भी उकेरे जाएंगे। साथ ही संगम और प्रयागराज के प्रमुख दर्शनीय स्थलों, तीर्र्थों के छायाचित्रों से कमरों को सजाया जाएगा। कथा स्थल पर पंडाल निर्माण के साथ ही अन्य साज सज्जा में अरैल के सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी मिला है।
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कोई युवा टेंट वाले के साथ, तो कोई मंच सज्जा में, तो कोई साउंड लाइट डेकोरेशन की टीमों के साथ लगा है। इंदौर के डेकोरेटर अजय मलंकार और उनकी टीम व्यासपीठ का निर्माण कर रही है। व्यासपीठ पर अक्षयवट के साथ अकबर के किले की अनुकृति उकेरी जाएगी। संत कृपा सनातन संस्थान नाथद्वारा (राजस्थान) की ओर अरैल में कथा पंडाल के निर्माण एक हजार से अधिक कारीगर दिन रात काम कर रहे हैं। संस्था के प्रवक्ता जेपी माली ने बताया कि गंगा,यमुना, विलुप्त सरस्वती केसंगम पर अक्षयवट के सामने नैनी के अरैल में प्रस्तावित मोरारी बापू की इस कथा का विषय ‘मानस अक्षयवट’ होगा।


रामकथा प्रेमियों के लिए मुफ्त बसें और आवास भी
प्रयागराज।
कथास्थल के आसपास 50 किमी दूर से रामकथा प्रेमियों के लिए मुफ्त बसों का संचालन संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से किया जाएगा। इसमें प्रतिदिन श्रोतागण कथा सुनने के लिए आएंगे और शाम को प्रभु प्रसाद के बाद अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। 100 किमी से अधिक दूर से आने वाले  रामकथा प्रेमियों के ठहरने के लिए मुफ्त आवास की व्यवस्था भी की जा रही है। जलमार्ग से भी कथा स्थल पर पहुंचने के लिए मुफ्त नौकाएं चलाई जाएंगी।
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