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Prayagraj : नासी ने घोषित किए 84 फेलो के नाम, एचआरआई की अदिति भी शामिल
Fri, 10 Oct 2025 06:36 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 06:36 PM IST
सार
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया (नासी) ने वर्ष 2025 के लिए नए फेलो की घोषणा कर दी है। इसमें देश के विभिन्न शीर्ष संस्थानों आईआईटी, आईआईएससी, आईसीएमआर, आईसीएआर, सीएसआईआर और इसरो से जुड़े 84 वैज्ञानिक शामिल हैं।
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राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नासी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया (नासी) ने वर्ष 2025 के लिए नए फेलो की घोषणा कर दी है। इसमें देश के विभिन्न शीर्ष संस्थानों आईआईटी, आईआईएससी, आईसीएमआर, आईसीएआर, सीएसआईआर और इसरो से जुड़े 84 वैज्ञानिक शामिल हैं। इसके अलावा आठ विदेशी वैज्ञानिकों को भी नासी का फेलो चुना गया है।
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इसमें झूंसी स्थित हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचआरआई) की वरिष्ठ प्रोफेसर अदिति सेन डे भी शामिल हैं। नासी के निदेशक डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि वैज्ञानिकों का चयन उनके दीर्घकालिक योगदान, शोध और नवाचार के आधार पर किया गया है।
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वर्ष 1914 में स्थापित नासी का मुख्यालय प्रयागराज में है। संस्था विज्ञान के प्रसार, नीति निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करती है। हर वर्ष यह भारत और विदेश के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को फेलो के रूप में सम्मानित करती है। इसमें 2000 वैज्ञानिक आवेदन करते हैं। जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों को चुना जाता है।
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क्वांटम शोध में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
प्रो. अदिति सेन डे का जन्म कोलकाता में हुआ था। स्कूली शिक्षा वहीं के शारदा आश्रम बालिका से पूरी हुई। गणित में ऑनर्स के साथ भौतिक विज्ञान में भी स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने आरसीएफ ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ फोटो ग्राफिक साइंसेज बर्सिलोना, स्पेन से क्वांटम सूचना सिद्धांत संघनित पदार्थ और सांख्यिकीय भौतिकी पर शोध किया। पिता अजीत कुमार डे भी शिक्षक थे।
उन्होंने स्पेन में प्रतिष्ठित रेमनन बाई काजल रिसर्च फेलोशिप हासिल की। वर्ष 2008 में वह भारत लौटीं और 2009 में एचआरआई से जुडीं। भारत सरकार की ओर से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने 2018 में भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार दिया था। उनके शोधपत्र क्वांटम एंटैंगलमेंट, क्वांटम कम्युनिकेशन और क्वांटम मापन सिद्धांत पर केंद्रित हैं जिन्हें दुनियाभर के वैज्ञानिक उद्धृत कर चुके हैं।