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दुखद: नहीं रहे वरिष्ठ गीतकार पं. दयाशंकर पांडेय, 90 वर्ष की उम्र में निधन से साहित्य जगत में शोक

Tue, 20 Oct 2026 05:11 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विकास कुमार Updated Tue, 20 Oct 2026 05:11 PM IST
सार

पं. दयाशंकर पांडेय के प्रमुख काव्य-संग्रहों में सुधियों की परतें (2001), परछाइयां (2004) और प्रतीक्षा के पहर (2014) उल्लेखनीय हैं। उनके संग्रह परछाइयां का द्वितीय संस्करण भी 2014 में प्रकाशित हुआ। आकाशवाणी और दूरदर्शन के इलाहाबाद केंद्र से भी उनका साहित्यिक जुड़ाव रहा।

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senior hindi lyricist dayashankar pandey passes away prayagraj
ब्रेकिंग न्यूज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी के वरिष्ठ गीतकार पं. दयाशंकर पांडेय का मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है। वे लगभग 90 वर्ष के थे। एजी ऑफिस, उत्तर प्रदेश से वरिष्ठ लेखाधिकारी पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे प्रयागराज के अल्लापुर क्षेत्र में निवास कर रहे थे।

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7 अगस्त 1939 को इलाहाबाद के मेजा क्षेत्र स्थित शुक्लपुर में जन्मे पं. दयाशंकर पांडेय की साहित्यिक पहचान एक संवेदनशील गीतकार के रूप में थी। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। उनकी रचनाएं हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं और अनेक कविता-संकलनों में संकलित की गईं। 

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उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में सुधियों की परतें (2001), परछाइयां (2004) और प्रतीक्षा के पहर (2014) उल्लेखनीय हैं। उनके संग्रह परछाइयां का द्वितीय संस्करण भी 2014 में प्रकाशित हुआ। आकाशवाणी और दूरदर्शन के इलाहाबाद केंद्र से भी उनका साहित्यिक जुड़ाव रहा। वे अपने सेवाकाल में ए.जी. ऑफिस ब्रदरहुड में अखिल भारतीय स्तर के सक्रिय पदाधिकारी भी रहे।

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उनके निधन पर आज वैचारिकी की ओर से आयोजित शोकसभा में साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके निधन को हिंदी गीत-साहित्य की अपूरणीय क्षति बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान और स्मृतियों को याद किया। शोकसभा में तलब जौनपुरी, शिवराम उपाध्याय, डॉ. शारदा पाण्डेय, डॉ. रविनंदन सिंह, डॉ. वीरेंद्र तिवारी, विवेक सत्यांशु, डॉ. अमिताभ त्रिपाठी, प्रो. रामकिशोर शर्मा, प्रो. रवि कुमार मिश्रा, के. पी. गिरी, शंभूनाथ त्रिपाठी ‘अंशुल’, शैलेन्द्र जय, डॉ. पारुल सिंह राठौर, सरिता मिश्रा, महक जौनपुरी जैसे रचनाकारों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की और दिवंगत गीतकार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

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