Court: मुर्गा चोरी के आरोप से तीस साल बाद ननके साबित हुए बेगुनाह, मुद्दई के खिलाफ चलेगा केस
मामला प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र का है। पचखरा गांव के राम गरीब ने चार फरवरी 1994 को ननके सिंह और मशहूर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि रात आठ बजे ननके सिंह उसका मुर्गा चोरी कर भाई लाल के घर चिकन बनवा रहा था। जानकारी होने पर जब वह ग्राम प्रधान गंगा सिंह को लेकर मौके पर पहुंचा तो ननके चिकन कुएं में फेंक कर भागने लगा।
विस्तार
जिला अदालत में दो मुल्जिमों पर मुर्गा चोरी का मुकदमा तीस साल चला। अब जाकर एक बेगुनाह साबित हुआ। जबकि दूसरे की मौत हो चुकी है। गवाही से मुकरने वाले मुद्दई के खिलाफ कोर्ट ने मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह फैसला अपर विशेष न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया है।
मामला प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र का है। पचखरा गांव के राम गरीब ने चार फरवरी 1994 को ननके सिंह और मशहूर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि रात आठ बजे ननके सिंह उसका मुर्गा चोरी कर भाई लाल के घर चिकन बनवा रहा था। जानकारी होने पर जब वह ग्राम प्रधान गंगा सिंह को लेकर मौके पर पहुंचा तो ननके चिकन कुएं में फेंक कर भागने लगा। उसे पकड़ने की कोशिश की तो मौके पर पहुंचे मशहूर सिंह ने ननके संग मिल कर उसकी पिटाई की और जाति सूचक गालियां दी। तहरीर में बताया गया था कि यह पहली बार नहीं था। इससे पहले भी ननके उसका बत्तख चुरा कर खाया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना की और ननके सिंह और मशहूर सिंह के खिलाफ चोरी और दलित उत्पीड़न की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। एससी-एसटी की विशेष अदालत में तीस साल चले मुकदमे के दौरान मशहूर सिंह की 2004 में मौत हो गई। कोर्ट में बयान देने पहुंचे मुद्दई राम गरीब ने अपनी कहानी का समर्थन नहीं किया। इसके बाद कोेर्ट ने ननके को बेगुनाह करार दिया।
राम गरीब पर चलेगा मुकदमा, होगी वसूली
1994 में दर्ज प्रकरण का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने कहा कि मुल्जिमों को तीस साल विचारण की वेदना में रहना पड़ा। राम गरीब अपनी कहानी से मुकर गया। इससे स्पष्ट होता है कि उसने झूठा साक्ष्य गढ़ा है। जिसके लिए उसके खिलाफ मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को पत्र भेज मुद्दई को दिए गए सरकारी अनुदान की वसूली कराने का निर्देश भी दिया है।