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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.

फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद

Sun, 12 Jan 2020 02:58 AM IST
विनोद सिंह सूर्य प्रकाश त्रिपाठी, अमर उजाला, प्रयागराज
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 12 Jan 2020 02:58 AM IST
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Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.
fansi - फोटो : Social Media

नैनी (प्रयागराज)। निर्भयाकांड के चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। भारतीय कानून के तहत दुर्लभ से दुर्लभ (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) अपराधों में ही फांसी की सजा दी जाती है। ऐसे में यह सवाल भी कौंधता है कि प्रदेश की सबसे पुरानी जेलों में शुमार नैनी सेंट्रल जेल में आखिरी बार कब और किसे फांसी दी गई थी। जानकर हैरानी होगी कि नैनी जेल में 30 साल पहले हत्या के जुर्म में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। मामले में चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिन दो भाइयों को फांसी हुई थी, उन दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ गवाही दी थी। इस सजा के बाद से जेल का फांसीघर बंद है और वहां तीनों फंदे आज भी सुरक्षित रखे गए हैं।

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Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.
चिंतित रहे आरोपियों के घरवाले - फोटो : अमर उजाला

अंग्रेजों के जमाने के केंद्रीय कारागार नैनी में आजादी के पहले कई कैदियों को फांसी दी जा चुकी है। यहां बाकायदा उसी जमाने का फांसीघर भी बना हुआ है। जेल रिकार्ड के मुताबिक इस फांसीघर में आखिरी बार 18 नवंबर 1989 में धारा 302 के तहत हत्या के जुर्म में दो सगे भाइयों बाबूलाल और अशर्फी पुत्र बंसू, श्रीकृष्ण पुत्र छेदालाल निवासी अह्लादगढ़, भवानीगढ़, शिवगढ़ रायबरेली को फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। उसके बाद आज तक किसी को फांसी की सजा नहीं दी गई। यहां आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो पुराने कैदियों श्यामलाल निवासी हमीरपुर व उसके भाई मेवालाल केवट ने बताया कि उस वक्त दो भाइयों को एक साथ फांसी होने की घटना चर्चा का विषय बनी थी।

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Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.
नैनी जेल में छापेमारी के बाद बाहर आते अधिकारी और कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला


डिप्टी जेलर अभय शुक्ला के अनुसार जेल में पुराने कैदियों के बीच हुई चर्चा में पता चलता है कि जब 1989 में तीनों कैदियों को फांसी का फैसला कोर्ट से आया तो उसमें स्पष्ट आदेश था कि दोनों सगे भाइयों को सेंट्रल जेल नैनी में एक ही दिन और एक ही समय पर फांसी पर लटकाया जाए। बताते हैं कि हत्या के जुर्म में पहले दोनों भाइयों को उम्रकैद और उनके दो बेटों को मियादी सजा मिली थी। बाद में उच्च न्यायालय में मामला पहुंचने पर भाइयों ने एक-दूसरे के खिलाफ गवाही दे दी थी। इस वजह से उन्हें फांसी की सजा मिली, जबकि उनके बेटों की मियादी सजा उम्रकैद में बदल गई थी।

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Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

बक्सर जेल से पहले फिलीपींस के मनीला जेल में बनता था फांसी का फंदा

सेंट्रल जेल नैनी ही नहीं बल्कि पूरे देश में फांसी का फंदा बिहार के बक्सर जेल में बनता है। फंदे की रस्सी को मनीला रस्सी बोला जाता है। यह परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। जेल प्रशासन के मुताबिक पहले फांसी का फंदा फिलीपींस की राजधानी मनीला में बनता था। बाद में बिहार के बक्सर में बनने लगा, लेकिन उसका नाम मनीला रस्सी ही चला आ रहा है, जो 172 धागों से तैयार की जाती है। इसकी लंबाई करीब 20 फीट होती है। इस रस्सी को ट्रेनिंग देकर कैदियों से ही बनवाया जाता है।

कैदियों को फांसी देने में जल्लाद की भूमिका अहम होती है, जो अब बहुत कम की संख्या में हैं। जब अदालत की ओर से किसी कैदी को फांसी की तिथि और समय निर्धारित कर दिया जाता है तो जेल प्रशासन शासन की मदद से जल्लादों को ढूंढता है। जेल प्रशासन के कुछ जानकारों ने बताया कि जल्लाद किसी भी कैदी को फांसी पर लटकाने से पहले उसके कान में कुछ कहता है। जानकारों के मुताबिक जल्लाद उस कैदी के कान में जाकर बोलता है ‘भाई! मुझे माफ करना, मैं सरकार के हुक्म का गुलाम हूं, इसलिए कुछ नहीं कर सकता’। उसके बाद अगर कैदी हिंदु है तो वह उसे राम-राम कहता है और अगर मुसलमान है तो उसे आखिरी सलाम कहकर फंदा खींच देता है।

Naini Central Jail: Three convicts were hanged for the last time 30 years ago.
प्रतीकात्मक तस्वीर
नैनी जेल में बंद है फांसी की सजा पाने वाले 11 कैदी

केंद्रीय कारागार, नैनी में इस वक्त कुल 11 कैदी हैं, जिन्हें फांसी की सजा हुई है। इनमें दो बांग्लादेशी आतंकवादी आलमगीर हुसैन उर्फ रोनी व ओबैदुर्रहमान बाबू उर्फ बाबू भाई के अतिरिक्त कल्लू, महेश्वरी पटेल, बद्री प्रसाद, रामानंद उर्फ दादू, हीरामनी पंडित, राम मिलन उपाध्याय, भूरा, सुभाष गर्ग व सलीम हैं। ये सभी कैदी यहां की हाई सिक्योरिटी सेल में रखे गए हैं।

जेल का हर कैदी हमारे लिए अहम होता है। यहां पर रिकार्ड के मुताबिक करीब 30 साल पहले तीन लोगों को फांसी की सजा हुई थी। यहां का फांसीघर अभी भी है, जो उसी समय से बंद है। अभी तक उसे खोलने की जरूरत नहीं पड़ी। अगर ऐसी जरूरत पड़ती है, तो उससे पहले उसकी साफ-सफाई कराई जाती है, उसे तैयार किया जाता है।
- हरिबक्स सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, नैनी सेंट्रल जेल। 
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