एक वर्ष में 75 रुपये सरसों का तेल तो 70 रुपये लीटर बढ़ा रिफाइंड का दाम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीनी, अरहर की दाल, काबुली चना, बेसन के दाम में भी हुई बढ़ोतरी
बीते एक वर्ष के दौरान तमाम खाद्य वस्तुओं के दामों में खासा इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष मई में जहां सरसों का तेल 100 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध था तो वह अब 175 से 180 रुपये में बिक रहा है। इसी तरह रिफाइंड के दाम में 70 रुपये तक की की बढ़ोतरी हो चुकी है। अरहर की दाल का दाम भी 20 रुपये किलो तक बढ़ चुका है। इस बढ़ोतरी से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है।
सरसों के तेल का ही उदाहरण लें तो पिछले माह की शुरुआत में सरसों का तेल 170 रुपये लीटर में मिल रहा था जो माह भर में ही 180 रुपये लीटर पर पहुंच गया। कुछ जगह दुकानदार भी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। हालांकि थोक विक्रेताओं का यही कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान खाद्य पदार्थों के दाम में काफी उछाल भी आया है। कोरोना की वजह से भी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। गृहणी सौम्या मालवीय का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं के दाम में जिस तरह बढ़े हैं उससे घर की रसाई का बजट बिगड़ गया है।
पिछले महीने खुला देशी घी 480 रुपये किलो में उपलब्ध था जो अब बढ़कर 530 से 550 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह सोहबतियाबाग की सोनम मिश्र ने बताया कि होली के पहले उन्होंने सरसों का तेल 160 रुपये के हिसाब से खरीदा था जो इस बार 180 रुपये में मिला। किराना कारोबारी प्रमिल केसरवानी ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा उछाल खाद्य तेल में ही आया है। इसके अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के भी दाम बढ़े हैं। अब सरकार ही खाद्य तेल के दाम पर नियंत्रण कर सकती है।