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हत्याभियुक्त की उम्रकैद सजा रद्द, हाईकोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश
Fri, 14 Feb 2020 08:11 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 14 Feb 2020 08:11 PM IST
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court of inquiry
- फोटो : court of inquiry
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में उम्र कैद की सजा पाए रामपुर के नंदलाल की सजा रद्द कर दी है । कोर्ट ने कहा कि यदि वह किसी अन्य मुकदमे में वांछित ना हो तो उसे रिहा किया जाए। दीनदयाल और नंदलाल को सेशन कोर्ट रामपुर ने 28 मई 1993 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी ।
अपील पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और सुरेश कुमार गुप्ता की पीठ ने सुनवाई की । अधिवक्ता सुधांशु कुमार गौर हरी कहना था कि वादी मुकदमा रघुनाथपुर गांव शाहबाद थाना निवासी श्री कृष्ण जो मृतक राम अवतार का पिता है कि घटनास्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है। वादी का कहना है कि वह अपने पुत्र रामअवतार के साथ 17 दिसंबर 1990 को सुबह साढ़े नौ बजे खेत में पानी लगाने के लिए सरकारी ट्यूबवेल पर गया था।
बिजली ना होने के कारण दोनों वहीं बैठ कर इंतजार कर रहे थे। तभी गांव के नंदलाल और दीनदयाल वहां पर आए और पहले अपने खेत में पानी लगाने की जिद करते हुए झगड़ा करने लगे।
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इसी बात को लेकर अभियुक्तों ने राम अवतार को चाकू मारकर घायल कर दिया। वादी अपने बेटे को बचाने दौड़ा तो उसे भी चाकू लेकर दौड़ा लिया गया। इसके बाद अभियुक्तों ने राम अवतार को पुआल में धकेलकर उसमें आग लगा दी। अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई।
अधिवक्ता का कहना था कि वादी मुकदमा की घटना स्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है, क्योंकि उसके मुताबिक वह अपने बेटे को कंधे पर उठाकर के घर तक ले गया मगर उसके शरीर और कपड़ों पर कहीं भी खून का दाग नहीं लगा। इसी प्रकार से मृतक के सिर में आई गंभीर और गहरी चोट का जिक्र ना तो वादी ने अपने बयान में किया है और ना ही प्राथमिकी में किया गया है कि वह चोट कैसे लगी।
कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील मंजूर करते हुए अभियुक्त नंदलाल को संदेह का लाभ देकर के बरी कर दिया ह।ै जबकि दीनदयाल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी इसलिए उसका मुकदमा समाप्त कर दिया।
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अपील पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और सुरेश कुमार गुप्ता की पीठ ने सुनवाई की । अधिवक्ता सुधांशु कुमार गौर हरी कहना था कि वादी मुकदमा रघुनाथपुर गांव शाहबाद थाना निवासी श्री कृष्ण जो मृतक राम अवतार का पिता है कि घटनास्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है। वादी का कहना है कि वह अपने पुत्र रामअवतार के साथ 17 दिसंबर 1990 को सुबह साढ़े नौ बजे खेत में पानी लगाने के लिए सरकारी ट्यूबवेल पर गया था।
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बिजली ना होने के कारण दोनों वहीं बैठ कर इंतजार कर रहे थे। तभी गांव के नंदलाल और दीनदयाल वहां पर आए और पहले अपने खेत में पानी लगाने की जिद करते हुए झगड़ा करने लगे।
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इसी बात को लेकर अभियुक्तों ने राम अवतार को चाकू मारकर घायल कर दिया। वादी अपने बेटे को बचाने दौड़ा तो उसे भी चाकू लेकर दौड़ा लिया गया। इसके बाद अभियुक्तों ने राम अवतार को पुआल में धकेलकर उसमें आग लगा दी। अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई।
अधिवक्ता का कहना था कि वादी मुकदमा की घटना स्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है, क्योंकि उसके मुताबिक वह अपने बेटे को कंधे पर उठाकर के घर तक ले गया मगर उसके शरीर और कपड़ों पर कहीं भी खून का दाग नहीं लगा। इसी प्रकार से मृतक के सिर में आई गंभीर और गहरी चोट का जिक्र ना तो वादी ने अपने बयान में किया है और ना ही प्राथमिकी में किया गया है कि वह चोट कैसे लगी।
कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील मंजूर करते हुए अभियुक्त नंदलाल को संदेह का लाभ देकर के बरी कर दिया ह।ै जबकि दीनदयाल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी इसलिए उसका मुकदमा समाप्त कर दिया।