Mahakumbh : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ऋषि इंटेलिजेंस की ओर बढ़ें, जलवायु सम्मेलन में चिदानंद सरस्वती की अपील
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण कदम डिकार्बोनाइजेशन है और इसके लिये ग्रीन ब्रांड कल्चर को विकसित करना होगा। अब समय आ गया कि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से ऋषि इंटेलिजेंस (आरआई) की ओर बढ़ें ताकि हमारे ऋषियों का जो ज्ञान है वह आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे।
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परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हमें ग्रीड कल्चर से ग्रीन कल्चर, नीड कल्चर से नए कल्चर की ओर बढ़ना होगा। हमें इकोनाॅमी के साथ इकोलाॅजी पर भी विशेष ध्यान देना होगा। हमें सस्टेनेबल विकास के लिए डिकार्बोनाइजेशन की ओर बढ़ना होगा।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण कदम डिकार्बोनाइजेशन है और इसके लिये ग्रीन ब्रांड कल्चर को विकसित करना होगा। अब समय आ गया कि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से ऋषि इंटेलिजेंस (आरआई) की ओर बढ़ें ताकि हमारे ऋषियों का जो ज्ञान है वह आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें सिर्फ तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि इसके प्रभावों को भी समझना होगा। वह रविवार को सेक्टर 25 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित जलवायु सम्मेलन को संबाेधित कर रहे थे।
हम यूज एंड थ्रो कल्चर से आगे बढ़ें
जलवायु परिवर्तन में संत, संस्था, समाज और सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। अब समय आ गया है कि हम यूज एंड थ्रो कल्चर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ें। दैनिक जीवन में जो चीजें हम उपयोग करते हैं, उनका हम सिर्फ इस्तेमाल करके फेंक देते हैं, इस सोच को बदलकर हमें यूज एंड ग्रो कल्चर को अपनाना होगा। हम जो भी वस्तुएं उपयोग करें, उनका पुन: उपयोग करें।
ऐसे ब्रांड्स को बढ़ावा देना होगा जो पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार हों। हमें यह समझना होगा कि किस ब्रांड का कार्बन उत्सर्जन कितना है और उसी आधार पर उन्हें प्राथमिकता देनी होगी। सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के साथ सीसीआर (सस्टेनेबिलिटी सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पर भी ध्यान देना होगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने हट कल्चर और हाट कल्चर को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए मेरा झोला मेरी शान का संदेश दिया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय पहल का आह्वान
प्रथम सत्र में पर्यावरण संरक्षण में धार्मिक नेताओं की भूमिका पर स्वामी मुकुंदानन्द ने धर्म और पर्यावरण के बीच के संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं से पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय पहल करने का आह्वान किया। शालिनी मेहरोत्रा, स्मृति गौर सिंह और डॉ. अरविंद कुमार ने भी अपने विचार साझा किए। दूसरे सत्र में जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने पवित्र नदियों के संरक्षण पर जोर दिया और जल सुरक्षा के महत्व पर चर्चा की।
पवित्र नदियों के संरक्षण को धार्मिक और सांस्कृतिक कर्तव्य बताया और इसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मददगार बताया। तीसरे सत्र में सतत धार्मिक केंद्र और धार्मिक आयोजन पर प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय और आचार्य हरि दास गुप्ता ने धार्मिक केंद्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। इस सत्र में डॉ. मनीषा वी. रामेश और सत्यब्रत साहू ने धार्मिक संस्थाओं में सतत व सुरक्षित प्रथाओं के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ विश्वास आधारित कार्यों पर चर्चा
चौथे सत्र में सरकारों की भूमिका में विश्वास आधारित जलवायु क्रियाएं पर अधिकारियों और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ विश्वास-आधारित कार्यों पर चर्चा की और इस पर विचार किया कि कैसे सरकारें धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर प्रभावी कदम उठा सकती हैं। पांचवें सत्र में मिशन लाइफ-सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में स्वामी आत्मश्रद्धानंद और आर. आर. रश्मि ने व्यक्तिगत स्तर पर सतत जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
छठवें सत्र में जलवायु अनुकूलन, शमन और आपदा राहत में धार्मिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा हुई। स्वागत प्रधान सचिव अनिल कुमार ने किया। समापन सत्र में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया और संकल्प पत्र जारी किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराया और सभी को सतत विकास के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।